राजनीति

पीएम मोदी के दोस्त ट्रंप ने H-1B वीजा की फीस बढ़ाई’, अमेरिकी राष्ट्रपति के आदेश पर भड़की कांग्रेस: ‘मोदी की कमजोरी उजागर’

पीएम मोदी के दोस्त ट्रंप ने H-1B वीजा की फीस बढ़ाई’, अमेरिकी राष्ट्रपति के आदेश पर भड़की कांग्रेस: ‘मोदी की कमजोरी उजागर’

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के तहत H-1B वीजा पर 1,00,000 डॉलर (करीब 88 लाख रुपये) की वार्षिक फीस लगाने के फैसले पर भारत में राजनीतिक हंगामा मच गया है। कांग्रेस ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘कमजोरी’ का प्रमाण बताते हुए तीखा हमला बोला है। पार्टी ने ट्रंप को ‘मोदी के दोस्त’ करार देते हुए कहा कि भारत के हितों की रक्षा करने में पीएम असफल साबित हुए। यह फीस 21 सितंबर 2025 से लागू हो जाएगी, जो भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स के लिए बड़ा झटका है।

ट्रंप ने शुक्रवार को व्हाइट हाउस में प्रोक्लेमेशन पर हस्ताक्षर करते हुए कहा कि H-1B प्रोग्राम का ‘अधिक उपयोग’ अमेरिकी नौकरियों को नुकसान पहुंचा रहा है। पहले फीस मात्र 1,500 डॉलर (लॉटरी रजिस्ट्रेशन 215 डॉलर और फॉर्म I-129 के 780 डॉलर) थी, लेकिन अब प्रत्येक नए आवेदन पर 1 लाख डॉलर सालाना देना होगा, जो छह साल तक चलेगा। वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक ने कहा, “यह फीस अमेरिकी श्रमिकों को प्राथमिकता देगी और विदेशी कंपनियों पर निर्भरता कम करेगी।” ट्रंप ने साथ ही 1 मिलियन डॉलर की ‘गोल्ड कार्ड’ वीजा योजना भी लॉन्च की, जो अमीर विदेशियों के लिए है।

भारत पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा, क्योंकि 2024 के यूएससीआईएस डेटा के मुताबिक H-1B वीजों का 71 प्रतिशत भारतीयों को मिलता है। नास्कॉम ने चेतावनी दी कि इससे आईटी कंपनियों की लागत 20-30 प्रतिशत बढ़ जाएगी। अमेजन को 12,000 से ज्यादा, जबकि टीसीएस, इंफोसिस और विप्रो जैसी भारतीय फर्मों को हजारों वीजा मिले थे। शेयर बाजार पर भी असर दिखा—कॉग्निजेंट के शेयर 5 प्रतिशत गिरे, जबकि इंफोसिस और विप्रो 2-5 प्रतिशत नीचे बंद हुए।

कांग्रेस ने इसे मोदी सरकार की कूटनीतिक नाकामी बताया। पार्टी प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “पीएम मोदी के दोस्त ट्रंप ने H-1B फीस बढ़ाकर लाखों भारतीय युवाओं का भविष्य दांव पर लगा दिया। मोदी जी की ‘मजबूत दोस्ती’ का यह नतीजा है। क्या वे ट्रंप से बात करेंगे या चुप रहेंगे?” राहुल गांधी ने ट्वीट किया, “ट्रंप का यह फैसला मोदी की कमजोरी उजागर करता है। भारत के हितों की रक्षा कौन करेगा?” पार्टी ने आरोप लगाया कि मोदी-ट्रंप की निजी दोस्ती राष्ट्रीय हितों पर भारी पड़ रही है।

 

विदेश मंत्रालय ने पहली प्रतिक्रिया में कहा कि यह कदम ‘मानवीय परिणाम’ पैदा कर सकता है, जैसे परिवारों का विघटन। प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने कहा, “हम सभी पक्षों से इसका अध्ययन कर रहे हैं।” पूर्व नीति आयोग सीईओ अमिताभ कांत ने कहा, “यह अमेरिका की नवाचार क्षमता को चोट पहुंचाएगा, जबकि भारत के शहरों जैसे बेंगलुरु और हैदराबाद को फायदा होगा।” अमेरिकी डेमोक्रेट कांग्रेसमैन राजा कृष्णमूर्ति ने इसे ‘लापरवाह’ बताया, कहा कि इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था को नुकसान होगा।

यह फैसला ट्रंप के पहले कार्यकाल की तरह विवादास्पद है, जब H-1B पर सख्ती की गई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह अदालती चुनौती का सामना कर सकता है, क्योंकि कांग्रेस ने केवल आवेदन शुल्क वसूलने की अनुमति दी है। भारतीय समुदाय में चिंता का माहौल है—कई प्रोफेशनल्स कनाडा या यूके की ओर रुख कर रहे हैं। नास्कॉम ने सदस्य कंपनियों को सलाह दी कि अमेरिका से बाहर मौजूद H-1B धारकों को तुरंत लौटने को कहें।

यह घटना भारत-अमेरिका संबंधों पर सवाल खड़े कर रही है। क्या मोदी सरकार कूटनीतिक स्तर पर हस्तक्षेप करेगी? फिलहाल, सभी की नजरें 21 सितंबर पर हैं, जब फीस लागू होगी। कांग्रेस का यह हमला चुनावी माहौल को और गरमा सकता है, जहां रोजगार मुद्दा प्रमुख है।

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