Thursday, September 10, 2026
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ट्रंप प्रशासन ने H-1B वीजा शुल्क बढ़ाकर 1 लाख डॉलर किया: भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स को बड़ा झटका, 21 सितंबर से लागू

ट्रंप प्रशासन ने H-1B वीजा शुल्क बढ़ाकर 1 लाख डॉलर किया: भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स को बड़ा झटका, 21 सितंबर से लागू

वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने H-1B वीजा कार्यक्रम पर कड़ा प्रहार करते हुए नई प्रोक्लेमेशन पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें प्रत्येक आवेदन के लिए 1,00,000 डॉलर (करीब 88 लाख रुपये) का वार्षिक शुल्क लगाया गया है। यह फैसला 21 सितंबर 2025 से लागू होगा, जो अमेरिकी तकनीकी उद्योग और विशेष रूप से भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है। ट्रंप प्रशासन का दावा है कि यह कदम कार्यक्रम के ‘अधिक उपयोग’ को रोकने और अमेरिकी नौकरियों की रक्षा के लिए है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि इससे कुशल विदेशी प्रतिभाओं का प्रवाह रुक जाएगा।

H-1B वीजा, जो विशेषज्ञता वाले विदेशी पेशेवरों को अमेरिका में अस्थायी रूप से काम करने की अनुमति देता है, पर अब तक की फीस लगभग 1,500 डॉलर (लॉटरी रजिस्ट्रेशन 215 डॉलर और फॉर्म I-129 के लिए 780 डॉलर सहित) थी। नई प्रोक्लेमेशन के तहत कंपनियों को प्रत्येक नए आवेदन के साथ या उसके पूरक के रूप में 1 लाख डॉलर का भुगतान करना होगा, जो हर साल दोहराया जाएगा। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने ब्लूमबर्ग को बताया कि यह शुल्क ‘पाथवे एब्यूज’ को रोकने और उच्च वेतन वाले विशेषज्ञों को प्राथमिकता देने के लिए है। पहले छमाही 2025 में अमेजन को 12,000 से अधिक, जबकि माइक्रोसॉफ्ट और मेटा को 5,000 से ज्यादा H-1B वीजा मिले थे।

भारतीय प्रोफेशनल्स पर इसका असर सबसे ज्यादा पड़ेगा, क्योंकि 2024 के यूएससीआईएस डेटा के अनुसार, H-1B वीजों का 70 प्रतिशत भारतीयों को मिलता है। नास्कॉम ने चिंता जताते हुए कहा कि यह ‘व्यवसायों, पेशेवरों और छात्रों के लिए अनिश्चितता पैदा करेगा’। इमिग्रेशन वकील सोफी अल्कॉर्न ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया, “कंपनियां अब जूनियर प्रोफेशनल्स को स्पॉन्सर करने से हिचकिचाएंगी, जिससे कई भारतीयों को भारत लौटना पड़ेगा या कनाडा, यूके, यूएई जैसे देशों की ओर रुख करना पड़ेगा।” इंडियन एम्बेसी ने अभी कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन विशेषज्ञों का अनुमान है कि इससे भारतीय आईटी कंपनियों की लागत 20-30 प्रतिशत बढ़ जाएगी।

ट्रंप का यह फैसला उनकी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति का हिस्सा है। वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक ने कहा, “अमेरिकियों को प्रशिक्षित करें, विदेशी श्रमिकों पर निर्भरता कम करें।” यह शुल्क एकत्र कर टैक्स कटौती और कर्ज चुकाने में इस्तेमाल होगा। रॉयटर्स के अनुसार, टेक कंपनियां चेतावनी दे रही हैं कि इससे वीजा धारकों को अमेरिका छोड़ना पड़ सकता है। 2020 में ट्रंप ने H-1B पर प्रतिबंध लगाए थे, जो कोविड के कारण थे, लेकिन अब यह स्थायी कदम है। गार्जियन ने इसे ‘अमेरिकी टेक इंडस्ट्री को बड़ा झटका’ बताया, क्योंकि भारत और चीन से आने वाले वर्कर्स पर निर्भरता अधिक है।

यह बदलाव लॉटरी सिस्टम को भी प्रभावित कर सकता है, जहां 65,000 सामान्य और 20,000 मास्टर्स डिग्री वालों के लिए वीजा उपलब्ध हैं। ब्लूमबर्ग ने बताया कि ट्रंप आवेदन प्रक्रिया में और बदलाव ला सकते हैं। भारतीय समुदाय में डर का माहौल है, खासकर ग्रीन कार्ड की लंबी प्रतीक्षा (दशकों की) के बीच। नास्कॉम ने सरकार से हस्तक्षेप की अपील की है। फिलहाल, सभी की नजरें 21 सितंबर पर हैं, जब यह शुल्क लागू होगा। यह कदम न केवल प्रवासन नीति को सख्त बनाएगा, बल्कि वैश्विक टैलेंट पूल को भी प्रभावित करेगा।

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