आजम खान को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत: क्वालिटी बार जमीन मामले में जमानत मंजूर, लेकिन जेल से रिहाई में अभी बाधा
आजम खान को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत: क्वालिटी बार जमीन मामले में जमानत मंजूर, लेकिन जेल से रिहाई में अभी बाधा
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रामपुर के क्वालिटी बार जमीन मामले में जमानत दे दी है। जस्टिस संदीप कुमार की एकलपीठ ने आजम खान की जमानत याचिका को मंजूर करते हुए उन्हें राहत प्रदान की। हालांकि, यह जमानत मिलने के बावजूद आजम खान की जेल से रिहाई तत्काल संभव नहीं है, क्योंकि उनके खिलाफ अन्य मामलों में जमानत याचिकाएं लंबित हैं। खान वर्तमान में सीतापुर जेल में बंद हैं और इस फैसले को एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
यह मामला रामपुर के सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के हाईवे पर स्थित क्वालिटी बार पर कथित तौर पर अवैध कब्जे से जुड़ा है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, आजम खान ने 2014 में राज्य संपत्ति को धोखाधड़ी से आवंटित कराने का प्रयास किया था। इस मामले में आजम खान पर भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज हुआ था। बाद में, पांच साल की जांच के बाद आजम को आरोपी बनाया गया। हाईकोर्ट में याचिका दायर करने के बाद सुनवाई हुई, जिसमें उनके वकील इमरान उल्लाह ने एफआईआर में देरी का हवाला देते हुए जमानत की मांग की। कोर्ट ने तर्कों को स्वीकार करते हुए जमानत मंजूर कर ली, लेकिन सशर्त रिहाई के लिए अन्य मामलों का निपटारा जरूरी बताया।
आजम खान के वकील ने कहा कि यह फैसला उनके क्लाइंट के लिए बड़ी राहत है, लेकिन डुंगरपुर जबरन बेदखली मामले और अन्य लंबित अपीलों के कारण रिहाई में देरी हो सकती है। डुंगरपुर मामले में भी हाल ही में 10 सितंबर को हाईकोर्ट ने आजम को जमानत दी थी, लेकिन वहां भी अपील लंबित होने से रिहाई नहीं हुई। आजम खान पर कुल 50 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें से कई में सजा हो चुकी है। समाजवादी पार्टी के नेता ने हमेशा इन मामलों को राजनीतिक प्रतिशोध का नाम दिया है।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस फैसले का स्वागत किया और ट्वीट कर कहा, “आजम खान को न्याय मिला है। भाजपा की साजिशें विफल हो रही हैं।” वहीं, भाजपा ने इसे न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा बताते हुए कोई टिप्पणी नहीं की। आजम खान की पत्नी तजीन फातिमा और बेटे अब्दुल्ला आजम पर भी कई मामले हैं, जिनमें कुछ में जमानत मिल चुकी है। पूर्व में फर्जी जन्म प्रमाण पत्र मामले में भी हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत दी थी।
यह फैसला उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा सकता है, खासकर आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए। आजम खान, जो 10 बार विधायक और एक बार सांसद रह चुके हैं, मुस्लिम समुदाय में मजबूत पकड़ रखते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार जमानत मिलने से उनकी राजनीतिक सक्रियता बढ़ सकती है। हालांकि, सीतापुर जेल से रिहाई के लिए अन्य मामलों में भी राहत जरूरी है। हाईकोर्ट ने जमानत के शर्तों में कहा है कि आजम कोर्ट की हर सुनवाई में हाजिर हों और जांच में सहयोग करें।
आजम खान की सेहत को लेकर भी चिंता जताई जा रही है, क्योंकि जेल में लंबे समय से बंद होने के कारण उनकी हालत कमजोर बताई जा रही है। वकीलों ने स्वास्थ्य आधार पर भी जमानत की मांग की थी। यह मामला 2014 से चला आ रहा है और राजनीतिक रंग ले चुका है। समाजवादी पार्टी ने इसे भाजपा सरकार की ‘बदले की राजनीति’ का उदाहरण बताया है। फिलहाल, आजम की टीम अन्य मामलों में तेजी से सुनवाई की मांग कर रही है।
