‘कोई वोट ऑनलाइन डिलीट नहीं किया जा सकता’: राहुल गांधी के आरोपों पर चुनाव आयोग का करारा जवाब
‘कोई वोट ऑनलाइन डिलीट नहीं किया जा सकता’: राहुल गांधी के आरोपों पर चुनाव आयोग का करारा जवाब
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर चुनाव आयोग (ईसीआई) ने आज तेज प्रतिक्रिया दी है। आयोग ने स्पष्ट किया कि “कोई वोट ऑनलाइन डिलीट नहीं किया जा सकता” और राहुल गांधी के दावों को “गलत और आधारहीन” बताया। ईसीआई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर फैक्ट-चेक पोस्ट जारी कर कहा कि कोई भी व्यक्ति या सदस्य ऑनलाइन वोटर लिस्ट से नाम हटाने का प्रयास नहीं कर सकता, और ऐसा कोई डिलीशन प्रभावित व्यक्ति को सुनवाई का मौका दिए बिना नहीं हो सकता। यह बयान राहुल गांधी की आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस के तुरंत बाद आया, जहां उन्होंने कर्नाटक के आलंद विधानसभा क्षेत्र में 6,018 वोटरों के नाम काटे जाने का ‘हाइड्रोजन बम’ सबूत पेश किया था।
ईसीआई के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व वाली टीम ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके आरोप “गलतफहमी पर आधारित” हैं। आयोग ने पुष्टि की कि 2023 में कर्नाटक के आलंद क्षेत्र में वोटर डिलीशन के असफल प्रयास हुए थे, जिसकी जांच के लिए आयोग ने स्वयं एफआईआर दर्ज कराई थी। ईसीआई ने राहुल गांधी से सबूत मांगते हुए कहा कि यदि वे अपने दावों पर विश्वास करते हैं, तो चुनाव नियमों के तहत शपथ-पत्र के साथ दस्तावेज जमा करें। अन्यथा, देश को गुमराह करने वाले “गंदे शब्दों” जैसे ‘वोट चोरी’ का इस्तेमाल बंद करें। आयोग ने जोर दिया कि वोटर लिस्ट में बदलाव केवल सत्यापित प्रक्रिया के माध्यम से होता है, जिसमें बोथ लेवल ऑफिसर की जांच और सुनवाई शामिल है।
राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया था कि भाजपा और ईसीआई की सांठगांठ से दलित, ओबीसी, आदिवासी और अल्पसंख्यक समुदायों के वोट सिस्टमेटिक तरीके से डिलीट किए जा रहे हैं। उन्होंने कर्नाटक के आलंद में एक बूथ लेवल अधिकारी के चाचा का नाम लिस्ट से गायब पाए जाने का उदाहरण दिया और कहा कि सॉफ्टवेयर के जरिए फर्जी लॉगिन ‘गोदाबाई’ से डिलीशन की कोशिश की गई। गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर आरोप लगाया कि वे “लोकतंत्र नष्ट करने वालों की रक्षा” कर रहे हैं। उन्होंने ईसीआई से डिजिटल वोटर रोल्स जारी करने और सीसीटीवी फुटेज साझा करने की मांग की, अन्यथा इसे अपराध में साझेदारी बताया।
यह विवाद 2024 लोकसभा चुनावों के बाद से चल रहा है। अगस्त में राहुल गांधी ने कर्नाटक के महादेवपुरा क्षेत्र में 1,00,250 फर्जी वोटों का दावा किया था, जहां एक ही पते पर 80 लोग रजिस्टर्ड थे। ईसीआई ने तब भी नोटिस जारी कर सबूत मांगे थे। हरियाणा, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों ने भी गांधी से शपथ-पत्र मांगा। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस.वाई. कुरैशी ने ईसीआई की प्रतिक्रिया को “आपत्तिजनक” बताते हुए जांच की मांग की। भाजपा ने गांधी के दावों को “झूठा प्रचार” करार दिया। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने व्यंग्य किया कि “राहुल गांधी का दिमागी चिप चोरी हो गया लगता है।”
विपक्षी दलों ने राहुल गांधी का समर्थन किया, जबकि जेडीयू नेता केसी त्यागी ने ‘वोट चोरी’ शब्द को अनुचित बताया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद महाराष्ट्र, हरियाणा और बिहार जैसे आगामी चुनावों को प्रभावित कर सकता है। ईसीआई ने कहा कि वे सभी शिकायतों की जांच करेंगे, लेकिन बिना सबूत के आरोपों से लोकतंत्र को नुकसान पहुंचता है। राजनीतिक हलचल तेज हो गई है, और विपक्ष ईसीआई कार्यालय पर मार्च की योजना बना रहा है। राहुल गांधी ने कहा, “सच्चाई सामने आएगी, और लोकतंत्र की रक्षा होगी।”
