सुप्रीम कोर्ट की SIT ने वंतारा को भेजे 200 सवाल: जानवरों के इलाज पर सवाल, CBI-ED समेत 16 एजेंसियां जांच में शामिल
सुप्रीम कोर्ट की SIT ने वंतारा को भेजे 200 सवाल: जानवरों के इलाज पर सवाल, CBI-ED समेत 16 एजेंसियां जांच में शामिल
सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) ने गुजरात के जामनगर में स्थित रिलायंस के वंतारा वाइल्डलाइफ सेंटर को 200 से अधिक सवालों वाली एक विस्तृत प्रश्नावली भेजी है। यह जांच जानवरों के साथ कथित दुर्व्यवहार और वन्यजीव संरक्षण नियमों के उल्लंघन के आरोपों पर आधारित है। सोशल मीडिया और समाचार रिपोर्टों पर आधारित जनहित याचिकाओं के बाद सुप्रीम कोर्ट ने जून में SIT का गठन किया था। SIT में पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्ती चेलामेश्वर की अध्यक्षता में वन्यजीव विशेषज्ञ, पशु चिकित्सक और कानूनी विशेषज्ञ शामिल हैं।
पिछले सप्ताह SIT ने वंतारा का तीन दिनों तक दौरा किया, जहां उन्होंने एनक्लोजर, क्वारंटाइन क्षेत्र, चिकित्सा सुविधाओं का निरीक्षण किया। दस्तावेजों की समीक्षा में पशु हस्तांतरण, फंडिंग, पशु चिकित्सा उपचार और कानूनी अनुमतियों पर फोकस रहा। वाइल्डलाइफ (प्रोटेक्शन) एक्ट, चिड़ियाघर नियमों और अंतरराष्ट्रीय संधियों का पालन जांचा गया। SIT के 195-200 सवालों में जानवरों की खरीद-बिक्री के स्रोत, उनके स्वास्थ्य रिकॉर्ड, मृत्यु दर, और फंडिंग के पारदर्शिता पर जोर दिया गया है। वंतारा प्रबंधन को दो सप्ताह के अंदर जवाब देने का निर्देश दिया गया है।
जांच को और गहरा करने के लिए CBI, ED समेत 16 केंद्रीय और राज्य एजेंसियों को शामिल करने की योजना है। इनमें वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB), राज्य वन विभाग, और अन्य जांच इकाइयां शामिल हैं। ED को फंडिंग के स्रोतों पर मनी लॉन्ड्रिंग एंगल से जांच करने को कहा जा सकता है, जबकि CBI को पशु तस्करी या अवैध व्यापार के पहलुओं पर फोकस करना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने SIT को तीन महीने में रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है। यदि अनियमितताएं पाई गईं, तो कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
वंतारा, जो अनंत अंबानी द्वारा संचालित है, दुनिया का सबसे बड़ा वाइल्डलाइफ रेस्क्यू सेंटर होने का दावा करता है। यहां 200 एकड़ में 2,000 से अधिक जानवर रखे गए हैं, जिनमें दुर्लभ प्रजातियां शामिल हैं। लेकिन याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि कई जानवर विदेशों से अवैध रूप से लाए गए, और उनका इलाज अपर्याप्त है। कुछ रिपोर्टों में शेरों और बाघों की मृत्यु का जिक्र है। रिलायंस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सभी गतिविधियां कानूनी हैं और पारदर्शी हैं। कंपनी ने SIT के सवालों का जवाब देने का भरोसा जताया है।
यह मामला न केवल पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे को उजागर करता है, बल्कि कॉर्पोरेट जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़े करता है। जानकारों का मानना है कि जांच के नतीजे वन्यजीव संरक्षण कानूनों को मजबूत कर सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट की इस पहल से अन्य प्राइवेट सेंटरों पर भी नजर पड़ेगी। वंतारा प्रबंधन की प्रतिक्रिया का इंतजार है, जो अगले हफ्ते आ सकती है।
