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लद्दाख: सियाचिन ग्लेशियर में भीषण हिमस्खलन में तीन सैनिक शहीद, राहत-बचाव कार्य जारी

दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र सियाचिन ग्लेशियर में मंगलवार को एक भीषण हिमस्खलन ने तीन भारतीय सैनिकों की जान ले ली। यह हादसा लद्दाख के सियाचिन बेस कैंप में हुआ, जो 12,000 फीट की ऊंचाई पर नियंत्रण रेखा के उत्तरी सिरे पर स्थित है। हिमस्खलन में फंसे तीन सैनिकों, जिनमें दो अग्निवीर शामिल थे, के शव बरामद कर लिए गए हैं, जबकि एक कैप्टन को पांच घंटे तक बर्फ में दबे रहने के बाद सुरक्षित निकाला गया। भारतीय सेना ने तत्काल राहत और बचाव अभियान शुरू किया, जो अभी भी जारी है।

हादसे का विवरण

महार रेजिमेंट के तीन सैनिक—गुजरात, उत्तर प्रदेश और झारखंड के निवासी—हिमस्खलन की चपेट में आए। सियाचिन में तापमान माइनस 60 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है, और हिमस्खलन यहाँ आम हैं। अधिकारियों के अनुसार, रविवार को हुए इस हादसे में सैनिक बर्फ और मलबे में फंस गए। बचाव दल ने कठिन परिस्थितियों में काम करते हुए शव बरामद किए। बचे हुए कैप्टन को सैन्य अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।

सियाचिन की चुनौतियां

सियाचिन ग्लेशियर, जिसे “दुनिया का सबसे ऊंचा युद्धक्षेत्र” कहा जाता है, अपनी चरम मौसमी परिस्थितियों और 18,000-20,000 फीट की ऊंचाई के लिए कुख्यात है। यहाँ तैनात सैनिक विशेष हाई-एल्टीट्यूड युद्ध प्रशिक्षण और उपकरणों के साथ काम करते हैं। पहले भी सियाचिन में हिमस्खलन की घटनाएं हो चुकी हैं—2021 में दो सैनिक, 2019 में चार सैनिक और दो पोर्टर, और 2016 में 10 सैनिकों की मौत हुई थी।

सेना और सरकार की प्रतिक्रिया

भारतीय सेना ने शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि दी और उनके परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। सेना के प्रवक्ता ने कहा, “हमारे जवान देश की सुरक्षा के लिए सबसे कठिन परिस्थितियों में डटे रहते हैं।” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने X पर शहीदों को नमन करते हुए लिखा, “उनका बलिदान राष्ट्र हमेशा याद रखेगा।” राहत कार्यों में NDRF और सेना के हेलिकॉप्टर तैनात किए गए हैं।

चुनौतियां और भविष्य

सियाचिन में बार-बार होने वाली ऐसी घटनाएं जलवायु परिवर्तन और ग्लेशियरों के अस्थिर होने की ओर इशारा करती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ते तापमान से हिमस्खलन का खतरा और बढ़ गया है। सेना ने बचाव कार्यों को तेज करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए तकनीकी उपायों पर जोर देने की बात कही है।

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