‘दलितों-पिछड़ों के लिए मोदी सरकार ने सरकारी क्षेत्र के दरवाजे बंद किए’, राहुल गांधी का कटिहार में केंद्र पर तीखा हमला
‘दलितों-पिछड़ों के लिए मोदी सरकार ने सरकारी क्षेत्र के दरवाजे बंद किए’, राहुल गांधी का कटिहार में केंद्र पर तीखा हमला
कटिहार, 23 अगस्त 2025: कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शनिवार को बिहार के कटिहार में ‘वोट अधिकार यात्रा’ के दौरान केंद्र की मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा। कदवा में एक विशाल रैली को संबोधित करते हुए राहुल ने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार संविधान को नष्ट करने की साजिश रच रही है और दलितों, आदिवासियों व पिछड़े वर्गों के लिए सेना और सरकारी क्षेत्र में अवसरों के दरवाजे बंद कर रही है। उन्होंने कहा, “मोदी सरकार की नीतियां दलितों और पिछड़ों के खिलाफ हैं। सरकारी नौकरियों और सेना में इन वर्गों के लिए अवसर सिकुड़ रहे हैं, जो संविधान के मूल्यों के खिलाफ है।”
राहुल ने बीजेपी पर संविधान बदलने की मंशा का आरोप लगाते हुए कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में जनता ने ‘400 पार’ के नारे को खारिज कर संविधान की रक्षा की। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी पार्टी जातिगत जनगणना और 50% आरक्षण की सीमा हटाने के लिए प्रतिबद्ध है। “जातिगत जनगणना देश का एक्स-रे है। यह बताएगा कि सत्ता और संसाधनों में किसका कितना हिस्सा है। बीजेपी इसे रोकना चाहती है, क्योंकि वे नहीं चाहते कि दलितों और पिछड़ों को उनका हक मिले,” उन्होंने कहा।
राहुल ने कटिहार में मखाने की खेती करने वाले किसानों से भी मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने मखाना किसान मोहम्मद सुल्तान से करीब 20-25 मिनट बात की और उनकी मेहनत की सराहना की। इस दौरान उन्होंने संविधान और लोकतंत्र की रक्षा का संदेश देते हुए कहा कि वोट की ताकत ही गरीबों, दलितों और पिछड़ों की आवाज है। उन्होंने ‘वोट चोरी’ के खिलाफ अपनी लड़ाई को तेज करने की बात भी दोहराई।
राहुल के साथ तेजस्वी यादव ने भी रोड शो में हिस्सा लिया, जिसमें दोनों नेताओं ने 1.5 किमी तक जनता का अभिवादन किया। इस रैली ने बिहार में 2025 के विधानसभा चुनाव से पहले विपक्षी इंडिया गठबंधन की एकजुटता को प्रदर्शित किया। राहुल ने बीजेपी पर दलित विरोधी मानसिकता का आरोप लगाते हुए कहा कि राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग जैसे संवैधानिक संस्थानों को कमजोर किया जा रहा है, जिससे दलितों की शिकायतों का समाधान नहीं हो पा रहा।
इस रैली ने बिहार की सियासत में हलचल मचा दी है, और विपक्षी गठबंधन ने संविधान, आरक्षण और सामाजिक न्याय के मुद्दों को केंद्र में लाने की कोशिश की है।
