Thursday, September 10, 2026
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​’ऑपरेशन RAGEPILL’ में NCB को बड़ी कामयाबी: पहली बार जब्त हुई ₹182 करोड़ की ‘जिहादी ड्रग’ कैप्टागॉन, अमित शाह ने दिया कड़ा संदेश

भारत को ‘ड्रग-फ्री इंडिया’ (नशामुक्त भारत) बनाने के संकल्प के बीच सुरक्षा एजेंसियों ने एक बहुत बड़ी अंतरराष्ट्रीय कामयाबी हासिल की है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को एक बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि ‘ऑपरेशन RAGEPILL’ के तहत नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) और अन्य एजेंसियों ने देश के इतिहास में पहली बार कैप्टागॉन (Captagon) नाम की सिंथेटिक ड्रग की एक विशाल खेप जब्त की है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस पकड़ी गई खेप की अनुमानित कीमत करीब 182 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

​मिडिल ईस्ट भेजी जा रही थी खेप, विदेशी नागरिक गिरफ्तार

​गृह मंत्री अमित शाह के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट भारत की धरती को एक ‘ट्रांजिट रूट’ (माल को एक जगह से दूसरी जगह भेजने का रास्ता) के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहा था। यह कंसाइनमेंट भारत के रास्ते मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) के देशों में भेजा जा रहा था, लेकिन मुस्तैद एजेंसियों ने इसे समय रहते इंटरसेप्ट कर जब्त कर लिया। इस हाई-प्रोफाइल मामले में एक विदेशी नागरिक को भी गिरफ्तार किया गया है, जिससे कड़ाई से पूछताछ की जा रही है।

​क्या है कैप्टागॉन और इसे ‘जिहादी ड्रग’ क्यों कहते हैं?

​कैप्टागॉन कोई साधारण नशा नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय अपराध और आतंकी फंडिंग का एक बड़ा जरिया बन चुका है।

​मूल रूप और बैन: इसका वैज्ञानिक नाम फेनेथिलीन (Fenethylline) है। इसे 1960 के दशक में एक दवा के रूप में विकसित किया गया था, लेकिन इसके भयानक और जानलेवा दुष्प्रभावों को देखते हुए दुनिया के अधिकांश देशों ने इस पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया था।

​’जिहादी ड्रग’ का लेबल क्यों?: मीडिया और वैश्विक सुरक्षा एजेंसियों ने इसे ‘जिहादी ड्रग’ का नाम दिया है। इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स के मुताबिक, सीरिया और मध्य पूर्व में सक्रिय कई दुर्दांत आतंकवादी संगठनों के लड़ाके युद्ध के मैदान में उतरने से पहले इस ड्रग का बड़े पैमाने पर सेवन करते हैं।

​शरीर पर असर: यह एक बेहद ताकतवर सिंथेटिक स्टिमुलेंट है। इसे लेने के बाद इंसान की नींद और भूख पूरी तरह गायब हो जाती है। शरीर में अत्यधिक ऊर्जा, कृत्रिम आत्मविश्वास और आक्रामकता का संचार होता है। सबसे खतरनाक बात यह है कि इसे खाने के बाद व्यक्ति को डर और दर्द का अहसास होना बंद हो जाता है, जिससे वह हिंसक और अनियंत्रित व्यवहार करने लगता है।

​गृह मंत्री का अल्टीमेटम— ‘एक ग्राम ड्रग्स भी बर्दाश्त नहीं’

​इस ऐतिहासिक कामयाबी पर गृह मंत्री अमित शाह ने नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के अधिकारियों और जवानों की जमकर सराहना की। उन्होंने टीम को ‘बहादुर और चौकस योद्धा’ बताते हुए बधाई दी।

​अमित शाह का कड़ा संदेश:

“भारत सरकार देश में नशीले पदार्थों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ (Zero Tolerance) की नीति पर काम कर रही है। हमारा रुख बेहद स्पष्ट है— हम भारत में आने वाले, या भारत की जमीन का इस्तेमाल कर दुनिया के किसी भी कोने में भेजे जाने वाले हर एक ग्राम ड्रग्स पर कड़ा प्रहार करेंगे। अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, भारत के चक्रव्यूह को पार नहीं कर पाएगा।”

​भारत के लिए क्यों अहम है यह कार्रवाई?

​विशेषज्ञों के अनुसार, कैप्टागॉन का अवैध कारोबार मुख्य रूप से अरब देशों में अरबों रुपये के संगठित अपराध और आतंकी फंडिंग से जुड़ा है। चूंकि भारत की भौगोलिक स्थिति अंतरराष्ट्रीय समुद्री और हवाई मार्गों के केंद्र में है, इसलिए तस्कर भारत को एक सुरक्षित कढ़ी की तरह इस्तेमाल करने की फिराक में रहते हैं। ‘ऑपरेशन RAGEPILL’ की यह आक्रामक सफलता दर्शाती है कि भारतीय एजेंसियां अब वैश्विक ड्रग नेटवर्क की हर चाल को नाकाम करने के लिए पूरी तरह मुस्तैद हैं।

 

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