अंडरकवर स्टिंग ऑपरेशन में सनसनीखेज खुलासे: सत्ता परिवर्तन, हिंसक प्रदर्शनों और फंडिंग को लेकर सामने आए कई बयान
अंडरकवर स्टिंग ऑपरेशन में सनसनीखेज खुलासे: सत्ता परिवर्तन, हिंसक प्रदर्शनों और फंडिंग को लेकर सामने आए कई बयान
नई दिल्ली: देश भर में ‘रिजीम चेंज’ (सत्ता परिवर्तन) और विरोध प्रदर्शनों को लेकर छिड़ी तीखी बहस के बीच मीडिया चैनल ‘टाइम्स नाउ नवभारत’ द्वारा प्रसारित एक अंडरकवर स्टिंग ऑपरेशन ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। इस स्टिंग ऑपरेशन में विभिन्न संगठनों से जुड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच हुई बातचीत के हवाले से कुछ चौंकाने वाले दावे सामने आए हैं, जिसमें कथित तौर पर लोकतांत्रिक तरीकों से हटकर अन्य माध्यमों से बदलाव की संभावनाओं पर चर्चा की गई है।
स्टिंग ऑपरेशन के प्रमुख खुलासे और बिंदु
सड़क पर हिंसक प्रदर्शन और फ्रांस-बांग्लादेश जैसे हालात की चर्चा:
मौलाना सिराज खान (मुंबई चीफ, जमीयत-उलेमा-ए-हिंद): रिपोर्टर द्वारा फ्रांस जैसे हिंसक प्रोटेस्ट की संभावना पर सवाल पूछे जाने पर उन्होंने कथित तौर पर गैर-मुस्लिमों के सड़क पर उतरने की बात कही और यह टिप्पणी की कि “मोमिन जिस दिन खड़ा होगा, किसी के संभाले संभलेगा नहीं।”
साफवान (मुस्लिम स्टूडेंट फेडरेशन): भारत में नेपाल और बांग्लादेश जैसे हालात पैदा होने की आशंका पर साफवान ने कथित तौर पर कहा कि “कुछ तो करना पड़ेगा” और यदि 20 जुलाई जैसी परिस्थितियां दोबारा बनती हैं, तो नेपाल जैसे हालात बन सकते हैं।
प्रदर्शनों में महिलाओं/लड़कियों को आगे रखने की रणनीति:
रिपोर्टर द्वारा प्रदर्शनों के दौरान महिलाओं को आगे रखने के तौर-तरीकों पर सवाल पूछे जाने पर साफवान ने कथित रूप से स्वीकार किया कि ऐसा जानबूझकर किया जाता है ताकि वे ढाल या दीवार की तरह काम कर सकें।
बातचीत में यह तर्क दिया गया कि पुरुष पुलिसकर्मियों के सामने महिलाओं के होने से प्रशासन के लिए कार्रवाई करना जटिल हो जाता है और इससे कथित तौर पर एक नकारात्मक छवि गढ़ने में मदद मिलती है।
आंदोलनों के वित्तपोषण (Funding) और संसाधनों पर सवाल:
क्रांतिकारी युवा संगठन (KYS) के कन्वीनर भीम से जब यह पूछा गया कि प्रदर्शनों के दौरान टेंट-दरी के अलावा पंखे, कूलर और बाउंसर जैसी महंगी व्यवस्थाओं के लिए प्रतिदिन लगभग पांच लाख रुपये का खर्च कहां से आ रहा था, तो उन्होंने आम लोगों और समर्थकों की संलिप्तता का जिक्र किया।
संगठन की प्रवक्ता मुदिता से भी बांग्लादेश जैसे आंदोलनों की तर्ज पर बदलाव की इच्छा को लेकर सवाल किए गए, जिस पर कथित सहमति के संकेत मिले।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं:
इस स्टिंग ऑपरेशन के सामने आने के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। सत्ता पक्ष जहां इसे देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और आंतरिक सुरक्षा को अस्थिर करने का सुनियोजित षड्यंत्र बता रहा है, वहीं इस पर विभिन्न पक्षों की ओर से प्रतिक्रियाएं आनी जारी हैं।

