सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी का नेशनल कॉन्फ्रेंस और लोकसभा से इस्तीफा; उमर अब्दुल्ला पर साधा निशाना
सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी का नेशनल कॉन्फ्रेंस और लोकसभा से इस्तीफा; उमर अब्दुल्ला पर साधा निशाना
श्रीनगर / बडगाम: जम्मू-कश्मीर की राजनीति में मंगलवार को एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला, जब वरिष्ठ शिया मुस्लिम नेता और श्रीनगर-बडगाम संसदीय क्षेत्र से सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) की प्राथमिक सदस्यता और अपने लोकसभा पद दोनों से इस्तीफे की घोषणा कर दी।
बडगाम कस्बे के बहिश्ती जहरा पार्क में अपने हजारों समर्थकों के बीच 80 मिनट लंबे विस्फोटक संबोधन के दौरान मेहदी ने भरे मंच पर अपने इस्तीफे के कागजातों पर हस्ताक्षर किए। इसके साथ ही उन्होंने जम्मू-कश्मीर में एक नए राजनीतिक विकल्प / संगठन के गठन की दिशा में मजबूत संकेत दिए।
उमर अब्दुल्ला और फारूक अब्दुल्ला पर तीखे हमले
रुहुल्लाह मेहदी ने अपने 24 साल पुराने पार्टी के रिश्ते को खत्म करते हुए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और NC अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला पर वादों से मुकरने और जनभावनाओं से खिलवाड़ करने के गंभीर आरोप लगाए:
”कुर्सी पर सत्ता है, सम्मान नहीं”: अपने भाषण की शुरुआत में उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “उमर साहब, आज आप जिस कुर्सी पर बैठे हैं, उसमें सत्ता तो है पर सम्मान नहीं। अगर सम्मान देखना है, तो बडगाम आइए।”
अनुच्छेद 370 और चुनाव रिकॉर्डिंग का खुलासा: मेहदी ने दावा किया कि 2024 लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी आलाकमान ने उनसे चुनाव लड़ने के लिए विनती की थी। उन्होंने कहा था कि NC भाजपा के सामने गिड़गिड़ाने के बजाय अनुच्छेद 370 की बहाली और राज्य के स्वाभिमान को मुख्य लक्ष्य बनाएगी। उन्होंने चेतावनी दी, “उन्होंने जो भी वादे किए थे, वह सब मेरे पास रिकॉर्ड पर मौजूद है और मैं उसे सार्वजनिक कर दूंगा।”
आरक्षण और बिजली दरों पर सवाल: उन्होंने सत्ता में आने के बाद वादों से पलटने का आरोप लगाते हुए कहा कि ओपन मेरिट के युवाओं को केवल 30% सीटें मिल रही हैं। उन्होंने याद दिलाया कि चुनाव से पहले स्मार्ट मीटर झेलम में फेंकने की बात कही गई थी, लेकिन सत्ता में आते ही बिजली दरें बढ़ा दी गईं।
डॉ. फारूक अब्दुल्ला को जवाब: फारूक अब्दुल्ला पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि कुरान का संदेश जालिमों के सामने न झुकने का है। उन्होंने चेतावनी दी कि जनता बहादुर है और दिल्ली से कोई भी उन्हें (उमर अब्दुल्ला को) बचाने नहीं आएगा।
राजनीतिक मायने
24 वर्षों तक नेशनल कॉन्फ्रेंस का प्रमुख चेहरा रहे रुहुल्लाह मेहदी के इस कदम से घाटी में नेशनल कॉन्फ्रेंस के शिया वोट बैंक और श्रीनगर-बडगाम क्षेत्र के राजनीतिक समीकरणों में भारी फेरबदल होना तय माना जा रहा है।

