राजनीति

रामलीला मैदान में विपक्ष की ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली: सीईसी के इस्तीफे की मांग, राहुल-अखिलेश-ममता का तीखा हमला

रामलीला मैदान में विपक्ष की ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली: सीईसी के इस्तीफे की मांग, राहुल-अखिलेश-ममता का तीखा हमला​

नई दिल्ली, 1 नवंबर 2026: दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में रविवार को इंडिया गठबंधन की ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ महारैली हुई। मुख्य मुद्दा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताएं, ‘वोट चोरी’ के आरोप और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग रहा।​

मार्च और भीड़

दोपहर करीब 12 बजे कनॉट प्लेस-मिंटो रोड जंक्शन से मार्च शुरू हुआ। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, मल्लिकार्जुन खरगे, अखिलेश यादव, ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी, तेजस्वी यादव, फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती समेत कई नेता खुली बस/जीप में सवार होकर मैदान पहुंचे। समर्थक झंडे और प्लेकार्ड लेकर नारेबाजी कर रहे थे — “वोट चोर, गद्दी छोड़” और “वोट बचाओ, देश बचाओ”।​

आयोजकों का दावा था कि 10 लाख तक लोग जुटेंगे, जबकि दिल्ली पुलिस का अनुमान 50 हजार के आसपास था। मैदान में अच्छी भीड़ जुटी, कुछ रिपोर्टों में क्षमता से ज्यादा होने और आसपास सड़कों पर फैलाव की बात कही गई। भाजपा ने रैली को ‘फ्लॉप’ बताते हुए दावा किया कि मैदान का बड़ा हिस्सा खाली रहा।​

लगभग 21 विपक्षी दलों ने हिस्सा लिया। आम आदमी पार्टी (आप) और डीएमके जैसे कुछ दल दूर रहे।​

मुख्य भाषण और आरोप

राहुल गांधी:

उन्होंने सबसे तीखा हमला किया। कहा कि 2024 लोकसभा चुनाव के बाद करीब 13.5 करोड़ (लगभग 15 प्रतिशत) मतदाताओं के नाम हटाए गए, जिससे वह चुनाव “अवैध और चोरी का” हो गया। मध्य प्रदेश, हरियाणा, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और कर्नाटक के विधानसभा चुनावों में भी EVM और वोटर लिस्ट के जरिए गड़बड़ी का आरोप लगाया।​

राहुल ने ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें जेल जाना चाहिए। अमित शाह के “मोदी कहीं नहीं जाएंगे” वाले बयान का जवाब देते हुए बोले — “हम उन्हें कहीं नहीं जाने देंगे। ज्ञानेश कुमार के बाद अब मोदी और शाह की बारी है। कानूनी कार्रवाई होगी।” उन्होंने इसे सिर्फ पार्टी का नहीं, बल्कि देश का आंदोलन बताया और मोहब्बत की दुकान का जिक्र करते हुए कहा कि नफरत नहीं, लोकतंत्र बचाना मकसद है।​

अखिलेश यादव:

उन्होंने रामलीला मैदान को “लोकतंत्र का हल्दीघाटी” बताया। यूपी में 1.27 करोड़ हिंदू मतदाताओं के नाम कटने का जिक्र कर भाजपा पर हमला बोला। कहा कि 2027 के चुनाव में भाजपा यूपी से बाहर हो जाएगी। अमित शाह के ‘अंगद का पैर’ वाले बयान पर तंज कसते हुए कहा कि अब उनके पैर के नीचे जमीन नहीं बची। महंगाई, बेरोजगारी और मीडिया पर अंकुश के मुद्दे भी उठाए।​

ममता बनर्जी:

उन्होंने कहा कि बंगाल SIR का शिकार है और “ज्ञानेश कुमार जल्द ‘वैनिश कुमार’ बन जाएंगे।” बंगाल चुनाव में चोरी का आरोप लगाया और लड़ाई जारी रखने की बात कही। एक नर्सरी राइम का व्यंग्यात्मक इस्तेमाल करते हुए सीईसी पर निशाना साधा।​

मल्लिकार्जुन खरगे:

उन्होंने केंद्र, महाराष्ट्र, बिहार और यूपी की सरकारों को “वोट चोरी की सरकारें” बताया और कहा कि मोदी को हटाना ही लोकतंत्र बचाने का रास्ता है।

अन्य नेताओं ने भी SIR, EVM और चुनावी पारदर्शिता पर सवाल उठाए।

भाजपा का जवाब

भाजपा ने रैली को समय की बर्बादी और भीड़ के दावों को झूठा बताया। अमित शाह ने चंडीगढ़ से रैली पर हमला बोलते हुए 1984 सिख विरोधी दंगों की सालगिरह का जिक्र किया। दिल्ली में भाजपा ने काउंटर मार्च भी निकाला। चुनाव आयोग और भाजपा दोनों आरोपों से इनकार करते रहे हैं।​

सुरक्षा और अन्य बातें

दिल्ली पुलिस ने करीब 4,000 जवान और CAPF की टुकड़ियां तैनात कीं। यातायात व्यवस्था बदली गई। रैली सुबह 10 से शाम 5 बजे तक चली।​

यह रैली पिछले कुछ हफ्तों में SIR के खिलाफ विपक्ष का बड़ा शक्ति प्रदर्शन थी। विपक्ष इसे 2027 के चुनावों से पहले लोकतंत्र और मताधिकार की लड़ाई बता रहा है, जबकि सत्ता पक्ष इसे राजनीतिक हंगामा करार दे रहा है।

(अपडेट: रैली शांतिपूर्ण रही। आगे की कार्रवाई और चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया पर नजर बनी हुई है।)

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