बिहार में दो निर्दलीय MLC के BJP में शामिल होने पर विवाद, RJD ने अयोग्यता की मांग की; बीजेपी बोली- सिर्फ समर्थन दिया
बिहार में दो निर्दलीय MLC के BJP में शामिल होने पर विवाद, RJD ने अयोग्यता की मांग की; बीजेपी बोली- सिर्फ समर्थन दिया
बिहार विधान परिषद के लिए निर्वाचित होने के कुछ ही घंटों बाद निर्दलीय विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) बंशीधर ब्रजवासी और राहुल राज के भाजपा में शामिल होने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। शनिवार को दोनों नेताओं की सदस्यता संबंधी पर्ची के साथ तस्वीरें और बयान सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिसके बाद विपक्षी दलों ने सवाल उठाए।
विवाद बढ़ने पर भाजपा की ओर से सफाई दी गई कि दोनों एमएलसी ने पार्टी की सदस्यता नहीं ली है, बल्कि केवल समर्थन दिया है। वहीं, राजद ने दोनों को अयोग्य घोषित करने की मांग की है। जन सुराज भी इस मामले में अदालत का रुख कर सकती है।
सदस्यता पर अंतिम फैसला सभापति का: नीरज कुमार
जेडीयू के नवनिर्वाचित एमएलसी नीरज कुमार ने कहा कि सदस्यता जाने या अयोग्यता के मामले में अंतिम फैसला लेने का अधिकार विधान परिषद के सभापति के पास है। ऐसे में इस मामले पर आखिरी निर्णय वही करेंगे।
विपक्ष के अदालत जाने की संभावना पर उन्होंने कहा कि कोर्ट जाने का अधिकार सभी को है।
राहुल राज बोले- मुख्यमंत्री के नेतृत्व में विश्वास
शनिवार को दोनों नेताओं ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में विश्वास जताया था। हाल में भाजपा छोड़ने वाले राहुल राज ने कहा कि गठबंधन की मजबूरियों के कारण उन्होंने पहले एक फैसला लिया था, लेकिन वह हमेशा से मुख्यमंत्री के नेतृत्व में विश्वास रखने वाले भाजपा कार्यकर्ता रहे हैं और उन्होंने फिर से पार्टी की सदस्यता ले ली है।
राहुल राज ने दावा किया कि नियमों के मुताबिक, यदि कोई निर्दलीय एमएलसी चुनाव के 15 दिन के भीतर किसी दल की सदस्यता लेता है, तो उसे पार्टी का अधिकृत उम्मीदवार माना जाएगा।
वहीं, बंशीधर ब्रजवासी ने कहा कि मुख्यमंत्री से चर्चा के बाद उन्होंने भाजपा में शामिल होने का फैसला किया। उनके मुताबिक, मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि पार्टी में शामिल होने से वह अपने निर्वाचन क्षेत्र के मुद्दों को बेहतर तरीके से उठा सकेंगे।
RJD ने दसवीं अनुसूची का हवाला देकर उठाए सवाल
राष्ट्रीय जनता दल ने दोनों नवनिर्वाचित विधान पार्षदों को अयोग्य घोषित करने की मांग की है। राजद के राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता और सांसद मनोज कुमार झा ने विधान परिषद के सभापति से मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की।
मनोज झा ने कहा कि निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में निर्वाचित होने के बाद किसी राजनीतिक दल में शामिल होना संविधान की दसवीं अनुसूची के प्रावधानों के तहत अयोग्यता का आधार हो सकता है। उन्होंने संविधान की दसवीं अनुसूची के पैरा 2(2) और अनुच्छेद 191(2) का उल्लेख करते हुए कहा कि चुनाव जीतने के बाद किसी दल की सदस्यता लेने वाले निर्दलीय सदस्य को सदन की सदस्यता के लिए अयोग्य घोषित किया जा सकता है।
झा ने कहा कि राजद इस मामले को विधान परिषद के सभापति के सामने उठाएगा और जरूरत पड़ने पर अदालत का दरवाजा भी खटखटाएगा। उन्होंने दावा किया कि दोनों निर्दलीय उम्मीदवारों ने चुनाव जीतने के बाद भाजपा की सदस्यता लेने से संबंधित पर्ची दिखाई थी और इस घटनाक्रम के वीडियो तथा अन्य सबूत मौजूद हैं।
उन्होंने कहा कि किसी दल को समर्थन देने और उसकी सदस्यता ग्रहण करने में अंतर है। राजद इस मामले की जानकारी चुनाव आयोग को भी देगा।
‘यह जनादेश के सम्मान से जुड़ा सवाल’
मनोज झा ने आरोप लगाया कि भाजपा ने जेडीयू को कमजोर करने के उद्देश्य से दोनों निर्दलीय उम्मीदवारों को अपने साथ जोड़ा है। उन्होंने कहा कि विधान परिषद के सभापति को निष्पक्ष निर्णय लेना चाहिए और संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप कार्रवाई करनी चाहिए।
राजद नेता ने चेतावनी दी कि यदि कार्रवाई नहीं हुई, तो पार्टी न्यायालय का रुख करेगी। उन्होंने कहा कि यह केवल समर्थन का मामला नहीं, बल्कि जनादेश के सम्मान से जुड़ा सवाल है।
झा ने इस मुद्दे को जनता के बीच उठाने की बात भी कही। उन्होंने इसे जनादेश की चोरी बताते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की भी परीक्षा करार दिया।
फिलहाल, दोनों एमएलसी के भाजपा में शामिल होने या केवल समर्थन देने को लेकर स्थिति पर विवाद बना हुआ है। मामले में विधान परिषद के सभापति के फैसले और संभावित कानूनी कार्रवाई पर नजर रहेगी।

