राष्ट्रीय

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: डिजिटल अरेस्ट स्कैम पर चिंता, बैंकों की लापरवाही पर मुआवजे और RBI को नियम बनाने के निर्देश

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: डिजिटल अरेस्ट स्कैम पर चिंता, बैंकों की लापरवाही पर मुआवजे और RBI को नियम बनाने के निर्देश

​नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने देश में तेजी से बढ़ रहे ‘डिजिटल अरेस्ट’ साइबर ठगी के मामलों पर गहरी चिंता जताई है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली 3 सदस्यीय बेंच ने कहा कि बार-बार जागरूकता अभियान चलाने के बावजूद लोग इस प्रकार की धोखाधड़ी का शिकार हो रहे हैं। कोर्ट ने साफ किया कि न्यायपालिका इस गंभीर मुद्दे पर सक्रिय है और वह संसद के किसी नए कानून का इंतजार नहीं करेगी। यह सुनवाई CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच कर रही है।

​”मोबाइल पर कोई गिरफ्तार कैसे हो सकता है?”

सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने हैरानी जताते हुए सवाल किया कि आखिर लोग यह कैसे मान लेते हैं कि उन्हें फोन या वीडियो कॉल के जरिए गिरफ्तार किया जा सकता है। कोर्ट को बताया गया कि हाल ही में एक महिला इस स्कैम के चलते अपने 2.5 करोड़ रुपये गंवा बैठी।

​सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए प्रमुख निर्देश और सुझाव:

​बैंकों की जवाबदेही और मुआवजा: कोर्ट ने कहा कि यदि बैंक या वित्तीय संस्थान अपनी लापरवाही या संदिग्ध लेन-देन को समय रहते रोकने में नाकाम रहते हैं, तो उन्हें साइबर ठगी के पीड़ितों को मुआवजा देने और आर्थिक नुकसान की भरपाई के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।

​RBI को निर्देश: केंद्र सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने बताया कि यह मामला भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दायरे में आता है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने RBI को निर्देश दिया कि वह वित्तीय संस्थानों की लापरवाही से होने वाली ठगी में पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए कड़े नियम बनाए। साथ ही, RBI से अगली सुनवाई में सभी अधिकृत वित्तीय संस्थानों की सूची पेश करने को कहा गया है।

​KYC नियमों में बदलाव की तैयारी: कोर्ट को अवगत कराया गया कि RBI ‘अपने ग्राहक को जानो’ (KYC) नियमों में संशोधन के लिए नए निर्देश तैयार कर रहा है, जिनके 30 नवंबर तक जारी होने और दिसंबर तक लागू होने की संभावना है।

​संदिग्ध लेन-देन पर तत्काल रोक: कोर्ट ने जोर दिया कि यदि किसी खाते से उसके सामान्य पैटर्न से हटकर कोई लेन-देन होता है, तो बैंकों को तुरंत एक्शन लेते हुए उसकी जांच करनी चाहिए और इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को देनी चाहिए।

​साइबर ठगी से 800 करोड़ रुपये का भारी नुकसान:

CJI सूर्यकांत ने आंकड़े सामने रखते हुए बताया कि अकेले इस साल डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर अपराधों के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था को लगभग 800 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

​बचाव के उपाय:

डिजिटल अरेस्ट स्कैम में ठग अक्सर खुद को पुलिस, सीबीआई, नारकोटिक्स या अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर लोगों को डराते हैं और गिरफ्तारी का खौफ दिखाकर पैसे ट्रांसफर करवाते हैं। कानूनन कोई भी जांच एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर किसी की गिरफ्तारी नहीं करती है। ऐसे किसी भी फ्रॉड कॉल से बचने की जरूरत है और संदेह होने पर तुरंत साइबर सेल या स्थानीय पुलिस से संपर्क करना चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *