टेनिस जगत के दिग्गज स्टेन वावरिंका ने लिया संन्यास: बेसल में खेला अपने करियर का आखिरी मुकाबला; तीन ग्रैंड स्लैम और ओलंपिक गोल्ड रहा शानदार सफर
टेनिस जगत के दिग्गज स्टेन वावरिंका ने लिया संन्यास: बेसल में खेला अपने करियर का आखिरी मुकाबला; तीन ग्रैंड स्लैम और ओलंपिक गोल्ड रहा शानदार सफर
स्विट्जरलैंड के महान टेनिस खिलाड़ी और अपने शानदार ‘वन-हैंडेड बैकहैंड’ (One-handed backhand) के लिए दुनिया भर में मशहूर स्टेन वावरिंका (Stan Wawrinka) ने प्रोफेशनल टेनिस को अलविदा कह दिया है। 41 वर्षीय इस दिग्गज खिलाड़ी ने घरेलू टूर्नामेंट ‘स्विस इंडोर्स बेसल’ में जिरी लेहेका के खिलाफ अपना आखिरी मुकाबला खेलने के बाद टेनिस कोर्ट को हमेशा के लिए गुडबाय कह दिया।
टेनिस के ‘बिग थ्री’ (रोजर फेडरर, राफेल नडाल और नोवाक जोकोविच) के स्वर्ण युग में अपनी अलग और मजबूत पहचान बनाने वाले वावरिंका का करियर उपलब्धियों से भरा रहा है।
1. शानदार करियर और प्रमुख उपलब्धियां:
3 ग्रैंड स्लैम खिताब: वावरिंका ने अपने करियर में कुल 3 प्रतिष्ठित ग्रैंड स्लैम सिंगल्स खिताब जीते। सबसे खास बात यह है कि उन्होंने अपने तीनों ग्रैंड स्लैम फाइनल में उस समय के दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ियों को मात दी थी:
2014 ऑस्ट्रेलियन ओपन: स्पेन के राफेल नडाल को हराकर।
2015 फ्रेंच ओपन: सर्बिया के नोवाक जोकोविच को हराकर।
2016 यूएस ओपन: एक बार फिर नोवाक जोकोविच को हराकर।
ओलंपिक गोल्ड मेडल: उन्होंने साल 2008 के बीजिंग ओलंपिक में अपने हमवतन महान खिलाड़ी रोजर फेडरर के साथ जोड़ी बनाकर पुरुष डबल्स का स्वर्ण पदक (Gold Medal) जीता था।
डेविस कप: फेडरर और वावरिंका की जोड़ी ने साल 2014 में स्विट्जरलैंड को उसका पहला ऐतिहासिक डेविस कप जिताया था।
मास्टर्स 1000 टाइटल: साल 2014 में उन्होंने मोंटे-कार्लो मास्टर्स के फाइनल में रोजर फेडरर को ही हराकर अपना एकमात्र एटीपी मास्टर्स 1000 खिताब अपने नाम किया था।
2. करियर के आंकड़े और रैंकिंग:
कैरियर बेस्ट रैंकिंग: वावरिंका जनवरी 2014 में अपनी करियर की सर्वश्रेष्ठ वर्ल्ड नंबर-3 रैंकिंग पर पहुंचे थे।
जीत के आंकड़े: उन्होंने अपने लंबे और शानदार करियर में कुल 590 टूर-लेवल मैच जीते और कुल 16 सिंगल्स टूर-लेवल टाइटल अपने नाम किए।
3. संन्यास पर क्या बोले स्टेन वावरिंका?
टेनिस को अलविदा कहते हुए एटीपी टूर डॉट कॉम से बातचीत में वावरिंका ने कहा:
”पिछले 20 सालों में एक खिलाड़ी के तौर पर मेरे बारे में अलग-अलग सोच रही है। मैं अपने करियर में बस इतना चाहता था कि अपना शत-प्रतिशत दूं, हमेशा लड़ूं और कोई पछतावा न हो। अपने लिए, विरोधी के लिए, टूर्नामेंट के लिए और फैंस के लिए—सबके लिए सम्मान के साथ रहूं। 20 से ज्यादा वर्षों तक यही हमेशा सबसे जरूरी चीज रही है, और यही एकमात्र तरीका है जिससे आप खेल बिना किसी पछतावे के छोड़ सकते हैं।”
टेनिस कोर्ट पर अपने आक्रामक शॉट्स और जुझारू रवैये के लिए याद किए जाने वाले स्टेन वावरिंका का खेल प्रेमियों के दिलों में हमेशा एक खास स्थान रहेगा।

