हैरी केन ने रचा इतिहास: 33 साल की उम्र में जीता प्रतिष्ठित ‘बैलन डी’ओर’ पुरस्कार, 25 साल बाद इंग्लैंड को मिला यह सम्मान
हैरी केन ने रचा इतिहास: 33 साल की उम्र में जीता प्रतिष्ठित ‘बैलन डी’ओर’ पुरस्कार, 25 साल बाद इंग्लैंड को मिला यह सम्मान
फुटबॉल जगत से एक बेहद ऐतिहासिक और गौरवशाली खबर सामने आई है। इंग्लैंड के स्टार स्ट्राइकर हैरी केन (Harry Kane) ने प्रतिष्ठित बैलन डी’ओर (Ballon d’Or) पुरस्कार अपने नाम कर लिया है। 33 वर्षीय केन ने फ्रांस के स्टार काइलियन एम्बाप्पे (दूसरा स्थान) और स्पेन के युवा खिलाड़ी लामिन यामाल (तीसरा स्थान) को पछाड़कर यह मुकाम हासिल किया है।
लंदन के पैलेडियम में आयोजित भव्य समारोह में उन्हें इस साल के विजेता के रूप में घोषित किया गया। इसके साथ ही उन्होंने पुरुष वर्ग में ‘स्ट्राइकर ऑफ द ईयर’ का खिताब भी अपने नाम किया।
1. 25 साल बाद इंग्लैंड के किसी खिलाड़ी का दबदबा:
माइकल ओवेन ने साल 2001 में बैलन डी’ओर जीता था। उसके बाद से पिछले 25 वर्षों में इंग्लैंड का कोई भी फुटबॉलर यह सम्मान हासिल नहीं कर सका था। अब हैरी केन ने इस लंबे इंतजार को खत्म करते हुए इतिहास रच दिया है।
वह बैलन डी’ओर जीतने वाले इंग्लैंड के पांचवें खिलाड़ी बन गए हैं। उनसे पहले सर स्टेनली मैथ्यूज, सर बॉबी चार्लटन, केविन कीगन और माइकल ओवेन यह प्रतिष्ठित पुरस्कार जीत चुके हैं। (दिलचस्प बात यह है कि 1956 में पहला बैलन डी’ओर भी इंग्लैंड के सर स्टेनली मैथ्यूज ने ही जीता था)।
इसके अलावा, वह जर्मन क्लब बायर्न म्यूनिख के लिए यह पुरस्कार जीतने वाले इतिहास के दूसरे खिलाड़ी बन गए हैं। उनसे पहले कार्ल-हाइंज रुमेनिगे ने 1980 और 1981 में लगातार दो बार यह उपलब्धि हासिल की थी।
2. रिकॉर्ड-तोड़ प्रदर्शन (65 मैचों में 73 गोल):
हैरी केन के लिए बीता सीजन उनके करियर का सबसे स्वर्णिम दौर रहा:
उन्होंने पिछले सीजन में क्लब और देश के लिए कुल 65 मुकाबलों में 73 गोल दागे।
उनके इस तूफानी प्रदर्शन के दम पर बायर्न म्यूनिख ने बुंडेसलीगा (Bundesliga), जर्मन कप और जर्मन सुपर कप के खिताब अपने नाम किए। जर्मन कप के फाइनल में उन्होंने स्टटगार्ट के खिलाफ शानदार हैट्रिक भी लगाई थी।
एक सीजन में सर्वाधिक गोल करने के मामले में वह लियोनेल मेसी (2011-12 में 82 गोल) के बाद अब सर्वकालिक सूची में दूसरे स्थान पर हैं।
राष्ट्रीय टीम (इंग्लैंड) के लिए खेलते हुए भी उन्होंने विश्व कप में 6 गोल दागे और गैरी लिनेकर को पीछे छोड़कर विश्व कप इतिहास में इंग्लैंड के लिए सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी बन गए।
3. संघर्ष से शिखर तक का सफर:
केन का यह सफर आसान नहीं रहा। टोटेनहम हॉटस्पर की अकादमी से निकलने के बाद शुरुआती दौर में उन्हें अपनी जगह पक्की करने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ा था। अनुभव हासिल करने के लिए उन्हें चार बार लोन पर दूसरे क्लबों में भेजा गया था। निचली लीगों से होते हुए उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत के दम पर दुनिया के सर्वश्रेष्ठ स्ट्राइकरों में अपनी गिनती कराई।
4. महिला वर्ग में एलेक्सिया पुटेलास की तीसरी जीत:
महिला वर्ग के बैलन डी’ओर पुरस्कार में स्पेन की स्टार मिडफील्डर एलेक्सिया पुटेलास (Alexia Putellas) ने इतिहास रचते हुए तीसरी बार यह प्रतिष्ठित पुरस्कार अपने नाम किया। उन्होंने बार्सिलोना के साथ महिला चैंपियंस लीग और स्पेन के साथ महिला नेशंस लीग का खिताब जीता है। इसके साथ ही उन्होंने एताना बोनमती के लगातार तीन साल के दबदबे को समाप्त किया।

