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पृथ्वी पर मंडराया ‘सुपर-डुपर अल नीनो’ का खतरा, वैज्ञानिकों ने वैश्विक तापमान में भारी वृद्धि और रिकॉर्ड गर्मी की दी चेतावनी

पृथ्वी पर मंडराया ‘सुपर-डुपर अल नीनो’ का खतरा, वैज्ञानिकों ने वैश्विक तापमान में भारी वृद्धि और रिकॉर्ड गर्मी की दी चेतावनी

​पृथ्वी का पर्यावरण और मौसम इन दिनों बेहद चिंताजनक दौर से गुजर रहा है। दुनियाभर के मौसम वैज्ञानिक अब तक सामान्य ‘अल नीनो’ को लेकर चेतावनी दे रहे थे, लेकिन अब वैज्ञानिकों ने इससे भी कई गुना अधिक खतरनाक ‘सुपर-डुपर अल नीनो’ की आशंका जताई है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रशांत महासागर द्वारा भारी मात्रा में गर्मी (हीट) बाहर छोड़े जाने के कारण पृथ्वी का एक बड़ा हिस्सा ‘असामान्य’ रूप से गर्म हो रहा है।

​’सुपर अल नीनो’ और मौसम से जुड़े प्रमुख बिंदु:

​WMO की चेतावनी: संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी ‘वर्ल्ड मेट्रोलॉजिकल ऑर्गेनाइजेशन’ (WMO) ने पहले ही अनुमान जताया था कि यह वर्ष 1950 के बाद से अब तक के सबसे ताकतवर अल नीनो में से एक हो सकता है। एजेंसी के अनुसार, मध्य और पूर्व प्रशांत महासागर (जो अल नीनो का केंद्र है) में अक्टूबर से दिसंबर के बीच समंदर का तापमान सामान्य से रिकॉर्ड 3.7 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा रह सकता है।

​क्लाइमेट मैप और तापमान के रिकॉर्ड: मौसम विज्ञानी रयान माउ द्वारा जारी किए गए क्लाइमेट मैप में पूरी पृथ्वी लगभग पूरी तरह लाल रंग में रंगी नजर आ रही है। उन्होंने एक्स (ट्विटर) पर पोस्ट कर बताया कि अल नीनो अपनी पूरी ताकत के साथ जारी है और अमेरिका को छोड़कर पूरी दुनिया में तापमान तेजी से बढ़ रहा है। वहीं, क्लाइमेट साइंटिस्ट जेक हॉसफादर ने दावा किया है कि इस साल समंदर का तापमान सामान्य से 3.4 डिग्री अधिक पहुंच गया है, जो आज तक के इतिहास में सबसे ज्यादा है। मौसम विशेषज्ञ लियोन साइमन्स ने इस स्थिति को ‘सुपर-डुपर अल नीनो’ का नाम दिया है।

​फरवरी 2027 तक असर: मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यह मौसमी घटना फरवरी 2027 तक बनी रहेगी। इसके प्रभाव से दुनियाभर में तापमान में भारी बढ़ोतरी होगी और बारिश के पैटर्न में गंभीर गड़बड़ी देखने को मिल सकती है, जिससे कुछ इलाकों में भीषण सूखा तो कुछ हिस्सों में भारी बाढ़ की स्थिति पैदा हो सकती है।

​स्वास्थ्य और जनजीवन पर प्रभाव: शिकागो यूनिवर्सिटी की क्लाइमेट इंपैक्ट लैब के शोधकर्ताओं ने पिछले महीने अनुमान जताया था कि इस ‘सुपर-अल नीनो’ के कारण जून से फरवरी 2027 के बीच दुनिया भर में अत्यधिक गर्मी और मौसम के दुष्प्रभावों से लगभग 4,51,000 अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं।

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