उत्तराखंड सरकार का बड़ा कदम, पिथौरागढ़ जिला न्यायालय परिसर में बनेगी 43 कारों की क्षमता वाली आधुनिक तीन मंजिला पार्किंग
उत्तराखंड सरकार का बड़ा कदम, पिथौरागढ़ जिला न्यायालय परिसर में बनेगी 43 कारों की क्षमता वाली आधुनिक तीन मंजिला पार्किंग
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जनपद में नागरिकों और न्यायलय में आने वाले लोगों को पार्किंग की गंभीर समस्या से राहत दिलाने के लिए धामी सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। आवास विभाग की सचिव एवं राज्य संपत्ति अधिकारी डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय समिति की बैठक में पिथौरागढ़ जिला न्यायालय परिसर में प्रस्तावित तीन मंजिला पार्किंग के निर्माण कार्य को गति देने और इसके पुनरीक्षित आगणन पर विस्तार से चर्चा की गई।
पिथौरागढ़ जिला न्यायालय पार्किंग परियोजना और बैठक से जुड़ी मुख्य बातें:
पुनर्निरीक्षित लागत और आगणन: कार्यदायी संस्था प्रांतीय खंड, लोक निर्माण विभाग (पिथौरागढ़) द्वारा इस तीन मंजिला पार्किंग के लिए 959.47 लाख रुपये का संशोधित विस्तृत आगणन तैयार किया गया है। पूर्व में शासन द्वारा कुल लागत का 40 प्रतिशत (यानी 270.61 लाख रुपये) की धनराशि अवमुक्त की जा चुकी है।
लागत में वृद्धि के कारण: परियोजना के पुनरीक्षित आगणन में 282.93 लाख रुपये की वृद्धि हुई है। अधिकारियों के अनुसार, इसमें इलेक्ट्रिफिकेशन (विद्युतीकरण), रिइनफोर्समेंट (सुदृढ़ीकरण) और दो लिफ्ट के अतिरिक्त प्रावधान शामिल किए गए हैं। समिति ने इन अतिरिक्त मदों के कारणों को लिखित रूप से स्पष्ट करते हुए प्रक्रिया को नियमानुसार आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
क्षमता और रणनीतिक स्थान: यह प्रस्तावित पार्किंग मार्केट वाली रोड पर स्थित होगी, जिससे इसकी उपयोगिता केवल जिला न्यायालय तक सीमित न रहकर आम नागरिकों के लिए भी बेहद फायदेमंद होगी। बहुमंजिला स्वरूप वाली इस पार्किंग की कुल क्षमता 43 कारों की होगी, जिसमें दो लिफ्ट लगने से विभिन्न स्तरों पर आवागमन बेहद सुगम हो जाएगा।
शुल्क निर्धारण और संचालन: पार्किंग के व्यवस्थित संचालन और रखरखाव के लिए जिलाधिकारी पिथौरागढ़ को शुल्क (फीस) निर्धारित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि वाहनों की आवाजाही और सुरक्षा व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाया जा सके।
पर्वतीय क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं पर जोर: आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों के अनुरूप पर्वतीय जनपदों में सीमित भूमि के बेहतर उपयोग और सुगम यातायात व्यवस्था के लिए ऐसी बहुमंजिला पार्किंग परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि सड़क किनारे अनियोजित पार्किंग की समस्या से निजात मिल सके।

