जम्मू-कश्मीर विधानसभा: नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायकों ने की शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की जयंती पर छुट्टी बहाल करने की मांग
जम्मू-कश्मीर विधानसभा: नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायकों ने की शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की जयंती पर छुट्टी बहाल करने की मांग
जम्मू-कश्मीर विधानसभा सत्र के दौरान सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) पार्टी के विधायकों ने एक बार फिर 5 दिसंबर को पार्टी संस्थापक स्वर्गीय शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की जयंती पर सार्वजनिक अवकाश को दोबारा बहाल करने की जोरदार मांग उठाई है।
प्रमुख बिंदु और चर्चा के मुख्य अंश
छुट्टी का इतिहास: वर्ष 2019 से पहले जम्मू-कश्मीर में हर साल 5 दिसंबर को शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की जयंती पर आधिकारिक अवकाश होता था, जिसे अनुच्छेद 370 हटने के बाद समाप्त कर दिया गया था।
शेख अब्दुल्ला का योगदान: एनसी विधायकों का तर्क है कि आधुनिक जम्मू-कश्मीर के निर्माण में शेख अब्दुल्ला का अहम योगदान रहा है। उनके कार्यकाल में लाए गए ऐतिहासिक सुधार—जैसे ‘जमीन जोतने वाले को जमीन का मालिकाना हक’, यूनिवर्सिटी स्तर तक मुफ्त शिक्षा और महिला सशक्तिकरण—ने एक प्रगतिशील राज्य की नींव रखी थी।
मुबारक गुल का बयान: वरिष्ठ एनसी नेता और विधायक मुबारक गुल ने सदन में कहा कि छुट्टियां सामूहिक यादों का प्रतीक होती हैं। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने अपने शासनकाल में कभी इतिहास के साथ छेड़छाड़ नहीं की या किसी अन्य नेता के नाम पर मौजूद छुट्टियों को नहीं हटाया। इसलिए 5 दिसंबर की छुट्टी को फिर से शुरू करना उनके योगदान को सच्चा सम्मान होगा।
2019 के बाद हुए बदलाव और एनसी का रुख
छुट्टियों में बदलाव: अनुच्छेद 370 हटने के बाद 13 जुलाई (शहीद दिवस) और 5 दिसंबर (शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की जयंती) की छुट्टियों को खत्म कर दिया गया था। इसके स्थान पर वर्ष 2019 से 23 सितंबर को स्वर्गीय महाराजा हरि सिंह की जयंती पर सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया।
महाराजा हरि सिंह की जयंती पर विरोध: नेशनल कॉन्फ्रेंस शुरू से ही 23 सितंबर को अवकाश मनाए जाने का विरोध करती रही है। पार्टी का तर्क है कि महाराजा एक शासक थे और उनके शासन से मुक्ति के बाद जनता के जनादेश के बिना शासन करने वाले राजा की याद में छुट्टी नहीं होनी चाहिए।
विधानसभा में इस मांग के उठने के बाद एक बार फिर क्षेत्र के राजनीतिक और ऐतिहासिक आयोजनों की छुट्टियों को लेकर बहस छिड़ गई है।
