ईरान की अमेरिका के सामने 7 शर्तें, बातचीत शुरू करने के लिए रखी मांगें
ईरान की अमेरिका के सामने 7 शर्तें, बातचीत शुरू करने के लिए रखी मांगें
ईरान के सुरक्षा परिषद सचिव मोहसिन रेजाई ने दावा किया है कि अमेरिका के साथ किसी भी तरह की बातचीत शुरू करने से पहले तेहरान ने अपनी सात शर्तें मध्यस्थों (कतर और पाकिस्तान) के जरिए वॉशिंगटन तक पहुंचा दी हैं। रेजाई का कहना है कि अगर अमेरिका अपने पैदा किए हालात और इस संघर्ष से बाहर निकलना चाहता है, तो उसे ईरान के अधिकारों और इन शर्तों को मानना ही होगा।
प्रमुख शर्तें और ईरान का रुख
शर्तें: ईरान की मुख्य शर्तों में सभी मोर्चों पर युद्ध पूरी तरह खत्म करना, फ्रीज की गई ईरानी संपत्तियों को जारी करना और देश के खिलाफ लगाई गई समुद्री नाकेबंदी को हटाना शामिल है।
परमाणु नीति और एनपीटी: ईरान ने अभी यह तय नहीं किया है कि वह परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने वाली संधि (एनपीटी) से बाहर निकलेगा या नहीं, और यह फैसला पूरी तरह अमेरिका के रवैये पर निर्भर करेगा। हालांकि, ईरान अभी भी दिवंगत सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के उस धार्मिक फतवे पर कायम है जिसमें परमाणु हथियार बनाने पर रोक है।
नेतन्याहू और ट्रंप पर निशाना: रेजाई ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति का आकलन गलत था और यह युद्ध नेतन्याहू ने शुरू करवाया था। ट्रंप की धमकियों का कोई असर नहीं होगा और ईरान किसी भी स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार है।
होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण को लेकर जुबानी जंग
दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि अमेरिकी सेना ने पिछले दो महीनों में होर्मुज जलडमरूमध्य से एक अरब बैरल से ज्यादा तेल ले जाने वाले जहाजों को सुरक्षा दी है। ईरान की सशस्त्र सेनाओं के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल अबोलफजल शेखरची ने इन दावों को ‘झूठा और हास्यास्पद’ बताते हुए कहा कि इस अहम समुद्री रास्ते पर पूरी तरह से ईरान का नियंत्रण है और उसकी इजाजत के बिना यहां से एक भी जहाज नहीं गुजर सकता।
यूएन में गूंजेगा मुद्दा
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगले हफ्ते संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करेंगे और न्यूयॉर्क में गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (जीसीसी) के नेताओं से मुलाकात के दौरान ईरान की परमाणु गतिविधियों को एक प्रमुख मुद्दा बनाएंगे।
