H-1B वीजा पर बड़ा फैसला: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 1 लाख डॉलर शुल्क वाले आदेश की अवधि एक साल और बढ़ाई
H-1B वीजा पर बड़ा फैसला: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 1 लाख डॉलर शुल्क वाले आदेश की अवधि एक साल और बढ़ाई
अमेरिका में नौकरी करने का सपना देख रहे लाखों विदेशी पेशेवरों, विशेष रूप से भारतीय आईटी कर्मचारियों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने H-1B वीजा पर 1 लाख डॉलर (लगभग 83 लाख रुपये) का भारी-भरकम शुल्क लगाने से जुड़े कार्यकारी आदेश की अवधि को एक साल और बढ़ा दिया है।
यह आदेश पहली बार सितंबर 2025 में जारी किया गया था और इस महीने इसकी अवधि समाप्त होने वाली थी, जिसे अब अगले साल तक के लिए बढ़ा दिया गया है। हालांकि यह मामला अभी अदालतों में विचाराधीन है, लेकिन इस फैसले ने टेक कंपनियों, विदेशी कर्मचारियों और अमेरिकी इमिग्रेशन नीति को लेकर बहस फिर से तेज कर दी है।
ट्रंप प्रशासन का पक्ष और वीजा शुल्क का विरोध
राष्ट्रपति ट्रंप लंबे समय से H-1B वीजा कार्यक्रम के आलोचक रहे हैं। उनका तर्क है कि कई कंपनियां अमेरिकी नागरिकों की जगह कम वेतन पर विदेशी कर्मचारियों को काम पर रखने के लिए इस कार्यक्रम का दुरुपयोग करती हैं। इसी उद्देश्य से ट्रंप प्रशासन मौजूदा 2,000 से 5,000 डॉलर के शुल्क को स्थायी रूप से बढ़ाकर कम से कम 1 लाख डॉलर करना चाहता है।
अदालतों में जारी है कानूनी लड़ाई
इस शुल्क वृद्धि को लेकर कानूनी मोर्चे पर भी खींचतान जारी है:
संघीय अदालत का फैसला: इस साल जून में एक संघीय न्यायाधीश ने ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए इस बढ़े हुए शुल्क को अवैध करार देते हुए इसकी वसूली पर रोक लगा दी थी। वर्तमान में बोस्टन स्थित अपीलीय अदालत इस फैसले की समीक्षा कर रही है।
चैंबर ऑफ कॉमर्स की चुनौती: इसके अलावा, अमेरिकी चैंबर ऑफ कॉमर्स की ओर से दायर एक अन्य चुनौती से जुड़े मामले पर भी अदालत विचार कर रही है।
H-1B वीजा कार्यक्रम और इसका महत्व
अमेरिकी कांग्रेस द्वारा 1990 में शुरू किया गया H-1B वीजा कार्यक्रम विशेष रूप से उन तकनीकी (टेक) कंपनियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो भारत और चीन से प्रतिभाशाली पेशेवरों की भर्ती करती हैं। इसके माध्यम से टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, आईटी और वित्तीय सेवाओं जैसे विशेषज्ञ क्षेत्रों के पेशेवर अमेरिका जाते हैं।
किन लोगों को मिलेगी छूट?
यह कड़ा आदेश कुछ विशेष श्रेणियों पर लागू नहीं होगा:
जो विदेशी नागरिक पहले से छात्र वीजा (Student Visa) पर अमेरिका में मौजूद हैं और बाद में H-1B वीजा प्राप्त करते हैं, उन पर यह नियम लागू नहीं होगा।
मौजूदा H-1B वीजा के नवीनीकरण (Renewal) पर भी यह आदेश लागू नहीं किया गया है।
इसका सबसे अधिक प्रभाव नए आवेदकों और पहली बार वीजा प्रायोजन (Visa Sponsorship) कराने वाली कंपनियों पर पड़ेगा।
उद्योग जगत की चिंताएं और भारत पर प्रभाव
अमेरिका के कई व्यापारिक संगठनों और बड़ी कंपनियों ने इस भारी-भरकम शुल्क का कड़ा विरोध किया है। उनका तर्क है कि इस वीजा कार्यक्रम की मदद से देश में उच्च कौशल वाले विशेषज्ञों की कमी को पूरा किया जाता है, और अत्यधिक शुल्क से कंपनियों की भर्ती योजनाएं बुरी तरह प्रभावित हो सकती हैं।
भारतीय प्रतिभाओं पर असर: H-1B वीजा का सबसे बड़ा लाभ भारतीय आईटी पेशेवरों को मिलता है। जानकारों का मानना है कि यदि यह 1 लाख डॉलर का शुल्क पूरी तरह लागू होता है, तो अमेरिकी कंपनियों की भर्ती लागत काफी बढ़ जाएगी, जिससे भारतीय प्रतिभाओं की मांग पर असर पड़ सकता है।
कंपनियों की रणनीति में बदलाव: रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, वीजा नियमों और जांच प्रक्रियाओं में हुए बदलावों के कारण कुछ बड़ी टेक कंपनियों (जैसे गूगल की मूल कंपनी अल्फाबेट) ने अमेरिका के बाहर, विशेषकर भारत में अपने परिचालन और निवेश को बढ़ाने की दिशा में काम करना शुरू कर दिया है।
