CBFC का पुनर्गठन और नई गाइडलाइंस जारी: ड्रग्स-हिंसा पर सख्ती और नई उम्र-आधारित UA कैटेगरी शामिल
सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) का पुनर्गठन और नई गाइडलाइंस जारी: ड्रग्स-हिंसा पर सख्ती और नई उम्र-आधारित UA कैटेगरी शामिल
भारत सरकार की सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) के पुनर्गठन के बाद फिल्मों के सर्टिफिकेशन के लिए नई और आधुनिक गाइडलाइंस जारी कर दी हैं। बोर्ड के 18 नए सदस्यों (पंकज त्रिपाठी, सुनील शेट्टी, प्रीति जिंटा और रूपाली गांगुली जैसे दिग्गज) की नियुक्ति के बाद आए ये नए नियम दिसंबर 1991 में जारी पुरानी गाइडलाइंस की जगह लेंगे। नई गाइडलाइंस का मुख्य उद्देश्य फिल्मों के कंटेंट को समाज के मूल्यों और वर्तमान मानकों के प्रति अधिक जिम्मेदार बनाना है।
CBFC की नई गाइडलाइंस के प्रमुख बदलाव:
ड्रग्स के सेवन और तस्करी पर सख्त चेतावनी: जिन फिल्मों में नशीले पदार्थों या साइकोट्रोपिक पदार्थों के सेवन और तस्करी को दिखाया जाएगा, उनके साथ तय कानूनी चेतावनी—जैसे ‘अवैध नशीले पदार्थ सेहत खराब करते हैं और जेल की सजा दिलाते हैं, नशीले पदार्थों को ना कहें’—दिखाना अनिवार्य कर दिया गया है।
उम्र-आधारित नई UA कैटेगरी: सिनेमैटोग्राफ एक्ट में संशोधन के बाद अब सर्टिफिकेशन फ्रेमवर्क में U और A के अलावा उम्र-आधारित तीन नई कैटेगरी—UA 7+, UA 13+ और UA 16+—को आधिकारिक रूप से शामिल कर लिया गया है, ताकि बच्चों को उनकी आयु के अनुसार सही कंटेंट मिल सके।
सर्टिफिकेशन और सामग्री के नए नियम:
हिंसा और समाज-विरोधी व्यवहार: नई गाइडलाइंस के तहत हिंसा, अपराध और ड्रग्स के दुरुपयोग पर कड़ी सीमाएं तय की गई हैं। समाज-विरोधी व्यवहार या हिंसा को आकर्षक (Glamorise) या सही ठहराना उचित नहीं माना जाएगा।
संवेदनशील विषयों पर नजर: बच्चों के प्रति दुर्व्यवहार, जानवरों के प्रति क्रूरता, दिव्यांगों से जुड़े दृश्यों, यौन हिंसा, सांप्रदायिक या देश-विरोधी भावनाओं तथा राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर भी विशेष सावधानी बरती जाएगी।
संदर्भ आधारित मूल्यांकन: फिल्मों के मूल्यांकन के दौरान केवल किसी एक दृश्य को अलग-थलग करके देखने के बजाय उसके समग्र संदर्भ, फिल्मांकन के समय और आज के सामाजिक मानकों को ध्यान में रखा जाएगा।
तीन दशक से अधिक समय बाद आए इन बदलावों का मकसद पुराने नियमों के मूल सिद्धांतों को बरकरार रखते हुए आज के दौर के हिसाब से फिल्म सर्टिफिकेशन सिस्टम को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाना है।
