अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और ईरान पर प्रतिबंधों से जुड़े ‘लिंडसे ओ. ग्राहम एक्ट 2026’ पर किए हस्ताक्षर, भारत और चीन जैसे बड़े खरीदार भी दायरे में
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और ईरान पर प्रतिबंधों से जुड़े ‘लिंडसे ओ. ग्राहम एक्ट 2026’ पर किए हस्ताक्षर, भारत और चीन जैसे बड़े खरीदार भी दायरे में
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को रूस और ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगाने से संबंधित एक बड़े विधेयक—’लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’—पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। अमेरिकी संसद (यूएस कांग्रेस) से पारित होने के बाद राष्ट्रपति की मुहर लगते ही यह विधेयक अब औपचारिक कानून बन गया है।
इस नए कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस आयात करने वाले दुनिया के पांच सबसे बड़े खरीदार देशों (जिनमें भारत और चीन भी शामिल हैं) पर 100 प्रतिशत तक का दंडात्मक टैरिफ (आयात शुल्क) लगाने का विवेकाधिकार मिल गया है।
कानून के मुख्य बिंदु और प्रावधान:
100% टैरिफ का अधिकार, लेकिन स्वतः लागू नहीं: बिल के प्रभाव में आते ही भारत या चीन पर तुरंत 100% टैरिफ लागू नहीं होगा। यह कानून राष्ट्रपति को द्विपक्षीय रणनीतिक स्थितियों और ऊर्जा खरीद की समीक्षा के आधार पर दंडात्मक टैरिफ लगाने की शक्ति देता है।
दिवंगत सीनेटर को श्रद्धांजलि: इस 48 पन्नों के कानून का नाम 11 जुलाई 2026 को दिवंगत हुए रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ओ. ग्राहम की स्मृति में रखा गया है, जो यूक्रेन के मुखर समर्थक और रूस के खिलाफ कठोर प्रतिबंधों के पैरोकार थे।
छूट के प्रावधान: कानून में यह स्पष्ट व्यवस्था है कि जो देश रूस से अपनी कुल जरूरत का 15 प्रतिशत से कम प्राकृतिक गैस आयात करते हैं और अपनी निर्भरता घटाने के लिए ठोस कदम उठा रहे हैं, उन्हें इन कड़े टैरिफ प्रतिबंधों से छूट मिल सकेगी।
रूस के वित्तीय तंत्र और ‘शैडो फ्लीट’ पर शिकंजा: कानून के तहत रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, शीर्ष अधिकारियों, केंद्रीय बैंकों, प्रमुख वित्तीय संस्थाओं और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को दरकिनार कर कच्चा तेल ढोने वाले रूस के गुप्त जहाजी बेड़ों (‘शैडो फ्लीट’) पर पूर्ण प्रतिबंध का प्रावधान किया गया है। साथ ही, ईरान के खिलाफ अमेरिकी प्रतिबंध लगाने के अधिकार को भी पांच साल के लिए बढ़ा दिया गया है।
अलबामा की रिपब्लिकन नेता केटी ब्रिट और टेक्सास के प्रतिनिधि माइकल मैककॉल ओवल ऑफिस में हस्ताक्षर के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप के साथ मौजूद रहे। अमेरिकी नेतृत्व का कहना है कि यह कानून रूस की युद्ध मशीन को फंड देने वाले देशों को कड़ा संदेश देने और यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में एक अहम कदम है।
