अंकिता भंडारी हत्याकांड: न्याय की मांग को लेकर गांधी पार्क से घंटाघर तक बनी मानव श्रृंखला, चार साल बाद भी वीआईपी की पहचान सार्वजनिक करने की उठ रही मांग
अंकिता भंडारी हत्याकांड: न्याय की मांग को लेकर गांधी पार्क से घंटाघर तक बनी मानव श्रृंखला, चार साल बाद भी वीआईपी की पहचान सार्वजनिक करने की उठ रही मांग
अंकिता भंडारी हत्याकांड को चार साल पूरे होने पर विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और जन सरोकारों से जुड़े संगठनों ने राज्य सरकार के खिलाफ गहरी नाराजगी जताई है। जन संगठनों के प्रतिनिधियों ने ‘अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच’ के बैनर तले देहरादून के गांधी पार्क में दिवंगत अंकिता भंडारी को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद गांधी पार्क से घंटाघर तक मानव श्रृंखला बनाकर प्रदर्शन किया गया और मामले में कथित वीआईपी की पहचान सार्वजनिक करने तथा पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई गई।
पूर्व सैनिकों और संगठनों की प्रमुख मांगें:
वीआईपी के नाम का खुलासा: उत्तराखंड के पूर्व सैनिक अर्ध सैनिक संयुक्त संगठन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रकाश थपलियाल ने कहा कि चार साल बीत जाने के बाद भी अंकिता के परिवार को न्याय का इंतजार है। संगठनों ने मांग की है कि मामले में कथित वीआईपी से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच हो और संलिप्त पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाए।
अंतिम संस्कार पर सवाल: वक्ताओं ने अंकिता के अंतिम संस्कार को लेकर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि अंतिम संस्कार देर शाम कराया गया, जो धार्मिक परंपराओं के विपरीत था। साथ ही, सीबीआई जांच को और अधिक पारदर्शी बनाने पर जोर दिया गया।
पारदर्शी कार्रवाई की चेतावनी: पूर्व सैनिकों ने कहा कि उत्तराखंड एक सैनिक बाहुल्य राज्य है और बेटियों की सुरक्षा बेहद अहम है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने पारदर्शी कार्रवाई नहीं की, तो आंदोलन को और अधिक तेज किया जाएगा।
इधर, उत्तराखंड महिला मंच से जुड़ी निर्मला बिष्ट ने भी हत्याकांड से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवालों के स्पष्ट जवाब सामने नहीं आने पर विरोध दर्ज कराते हुए कई गंभीर प्रश्न उठाए।
