अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ने उठाया बलूचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघनों का मुद्दा, पाकिस्तान पर गंभीर आरोप
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ने उठाया बलूचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघनों का मुद्दा, पाकिस्तान पर गंभीर आरोप
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ‘ग्लोबल ह्यूमन राइट्स डिफेंस’ (जीएचआरडी) ने जिनेवा में आयोजित संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 63वें सत्र के दौरान बलूचिस्तान में हो रहे गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों का मामला उठाया है। संगठन ने पाकिस्तानी अधिकारियों पर कार्यकर्ताओं, छात्रों और लापता लोगों के परिवारों को मनमाने ढंग से हिरासत में लेने, जबरन गायब करने और उनके खिलाफ बदले की कार्रवाई करने का गंभीर आरोप लगाया है।
बीवाईसी नेताओं की हिरासत और आतंकवाद विरोधी अदालत का फैसला
जीएचआरडी ने जिनेवा में संबोधन के दौरान बलूच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) के नेताओं की लगातार हिरासत का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। संगठन ने महरंग बलूच, बीबो बलूच और गुलजादी बलूच जैसी शख्सियतों की हिरासत पर चिंता जताई। इसके साथ ही, 22 जून 2026 को पाकिस्तान की एक आतंकवाद विरोधी अदालत द्वारा बीवाईसी नेताओं महरंग बलूच और सिबगतुल्लाह शाहजी को सुनाई गई उम्रकैद की सजा का जिक्र किया। संगठन का कहना है कि यह फैसला जेल में जल्दबाजी में की गई गुप्त सुनवाई के बाद आया, जिसमें हिंसा से उनके सीधे संबंध का कोई पुख्ता सबूत पेश नहीं किया गया था।
परिवारों पर दबाव और सामूहिक सजा का आरोप
संगठन ने बलूच नागरिकों के परिवारों पर डाले जा रहे दबाव का भी पर्दाफाश किया। जीएचआरडी के मुताबिक, परिवारों को ऐसे रिश्तेदारों से खुद को अलग करने का लिखित ऐलान करने के लिए मजबूर किया जाता है जिन पर उग्रवाद का आरोप होता है, और ऐसा न करने पर संपत्ति जब्ती जैसी आतंकवाद विरोधी कार्रवाइयों की धमकी दी जाती है। संगठन ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी अपराध की जिम्मेदारी केवल उस व्यक्ति की होनी चाहिए जिसने उसे किया है, और इसके लिए पूरे परिवार को सजा नहीं दी जा सकती।
संयुक्त राष्ट्र से तत्काल हस्तक्षेप की अपील
जीएचआरडी और बलूच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद और मानवाधिकार उच्चायुक्त से अपील की है कि वे पाकिस्तान पर दबाव बनाएं ताकि:
जबरन लोगों को गायब करने और सामूहिक सजा देने की प्रथा को तुरंत रोका जाए।
सभी लापता लोगों के बारे में स्पष्ट जानकारी दी जाए।
निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित की जाए।
शांतिपूर्ण तरीके से मानवाधिकारों की आवाज उठाने के कारण हिरासत में लिए गए सभी बलूच कार्यकर्ताओं को रिहा किया जाए।
बीवाईसी का आरोप है कि बलूचिस्तान में सैन्य मौजूदगी बढ़ाना, लोगों की रोजी-रोटी खत्म करना और उन्हें विस्थापित करना आम नागरिकों के खिलाफ अपनाई जा रही एक योजनाबद्ध नीति का हिस्सा बन चुका है, जहां सड़कों पर मिलने वाले क्षत-विक्षत शव इस हिंसा की भीषण अमानवीयता को बयां करते हैं।
