Tuesday, September 8, 2026
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फिल्म ‘रूप की रानी चोरों का राजा’ में श्रीदेवी का आइकॉनिक लुक: डिजाइनर नीता लुल्ला ने शेयर किया 1988 की हॉलीवुड फिल्म से प्रेरित किस्सा

फिल्म ‘रूप की रानी चोरों का राजा’ में श्रीदेवी का आइकॉनिक लुक: डिजाइनर नीता लुल्ला ने शेयर किया 1988 की हॉलीवुड फिल्म से प्रेरित किस्सा

​मुंबई: राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फैशन डिजाइनर नीता लुल्ला ने 1993 की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘रूप की रानी चोरों का राजा’ में दिवंगत अभिनेत्री श्रीदेवी के प्रसिद्ध कॉस्ट्यूम से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा साझा किया है। नीता ने बताया कि इस गाने के लिए तैयार किया गया भव्य आउटफिट 1988 की हॉलीवुड फिल्म ‘कमिंग टू अमेरिका’ (जिसमें एडी मर्फी थे) से प्रेरित था।

​1. आइडिया से लेकर स्केच बनने तक का सफर

​हॉलीवुड का प्रभाव: 1988 में ‘कमिंग टू अमेरिका’ देखने के कुछ ही हफ्तों बाद नीता लुल्ला को श्रीदेवी का फोन आया। मुलाकात के दौरान नीता के दिमाग में उस फिल्म का भव्य स्टाइल ताजा था।

​श्रीदेवी से चर्चा: नीता ने श्रीदेवी को पंखों और कई परतों वाले एक बहुत ही भव्य (Grand) आउटफिट का विचार दिया। श्रीदेवी के पूछने पर कि “क्या तुम सच में ऐसा कर पाओगी?”, नीता ने तुरंत स्केच बनाना शुरू किया।

​डिजाइन: स्केच में कई लेयर्स वाली स्कर्ट, ऊपर गोल्ड मेटल की डिटेलिंग और पंखों (Feathers) वाला एक हेडगियर शामिल था।

​2. क्राफ्टिंग और शूटिंग की चुनौतियां

​क्रॉफर्ड मार्केट से सामान: हेडगियर और ड्रेस के लिए नीता ने मुंबई के क्रॉफर्ड मार्केट से पंख खरीदे। इसके अलावा चेन मेल, स्टोन्स, राइनस्टोन्स, मेटल के टुकड़े और इजिप्टियन पाल्मेट मोटिफ्स का इस्तेमाल कर हाथ से यह भारी ड्रेस तैयार की गई।

​800 मेटल के टुकड़े: नीता के अनुसार, इस पोशाक को सोची गई सीमाओं से परे जाकर बनाया गया था, जिसमें 800 से अधिक मेटल पीस लगे थे।

​कड़ी मेहनत: उन दिनों गाने की शूटिंग रोजाना सुबह 9 बजे से रात 10:30 बजे तक चलती थी। डांस मूव्स काफी जोरदार होने के कारण रोजाना गहने या पंख निकल जाते थे, जिन्हें नीता हर रात घर ले जाकर रिपेयर करती थीं और अगली सुबह फिर शूटिंग पर लाती थीं।

​3. ‘रूप की रानी चोरों का राजा’ के मुख्य बिंदु

​स्टार कास्ट: अनिल कपूर, श्रीदेवी, अनुपम खेर, जॉनी लीवर और जैकी श्रॉफ।

​बजट और निर्देशन: यह उस समय की सबसे महंगे बजट वाली हिंदी फिल्म थी। इसका निर्देशन सतीश कौशिक ने किया था (शुरुआत में शेखर कपूर निर्देशक थे, जिन्होंने बाद में प्रोजेक्ट छोड़ दिया था) और इसकी कहानी जावेद अख्तर ने लिखी थी।

​कहानी: फिल्म की कहानी जुगरान नाम के अपराधी द्वारा मारे गए एक कस्टम अधिकारी और डॉक्टर के अनाथ बच्चों की है, जो बड़े होकर अपने माता-पिता की हत्या का बदला लेते हैं।

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