जलवायु परिवर्तन का असर: उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों और बुग्यालों में वनाग्नि के खतरों पर रिसर्च कराएगा वन विभाग
जलवायु परिवर्तन का असर: उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों और बुग्यालों में वनाग्नि के खतरों पर रिसर्च कराएगा वन विभाग
देहरादून: जलवायु परिवर्तन और बढ़ते तापमान के कारण उत्तराखंड के संवेदनशील उच्च हिमालयी क्षेत्रों में भी वनाग्नि (जंगलों की आग) का खतरा बढ़ने लगा है। पिछले वर्ष विश्व प्रसिद्ध ‘फूलों की घाटी’ (Valley of Flowers) के समीपवर्ती जंगलों तक आग पहुंचने की गंभीर घटना के बाद, उत्तराखंड वन विभाग ने उच्च हिमालयी क्षेत्रों और बुग्यालों (हिमालयी घास के मैदान) पर वनाग्नि के प्रभावों को समझने के लिए एक विस्तृत वैज्ञानिक शोध कराने का निर्णय लिया है।
1. वैज्ञानिक अध्ययन के मुख्य बिंदु और उद्देश्य
भौगोलिक विस्तार का पता लगाना: अध्ययन के तहत सबसे पहले यह चिन्हित किया जाएगा कि उच्च हिमालयी क्षेत्रों में आग किन-किन स्थानों तक पहुंची है, इसका भौगोलिक विस्तार कितना रहा है और किन परिस्थितियों में आग ऊपरी इलाकों की ओर बढ़ी।
पारिस्थितिकी तंत्र और जैव विविधता पर प्रभाव: रिसर्च में यह आंका जाएगा कि आग का दुर्लभ वनस्पतियों, संवेदनशील प्रजातियों और नाजुक हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र पर क्या प्रभाव पड़ा है।
संभावित हॉटस्पॉट्स की पहचान: शोध का मुख्य उद्देश्य भविष्य में वनाग्नि के लिहाज से संवेदनशील बनने वाले उच्च हिमालयी क्षेत्रों/हॉटस्पॉट्स की समय रहते पहचान करना है, ताकि वहां पहले से रोकथाम व निगरानी की व्यवस्था बनाई जा सके।
2. बुग्यालों के लिए बढ़ता खतरा
सूखी घास बनी ‘ईंधन’: बुग्याल (हिमालयी मखमली घास के मैदान) बेहद संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र हैं। गर्मियों के दौरान यहां उगने वाली सूखी घास व वनस्पतियां वनाग्नि के लिए ईंधन का काम कर सकती हैं।
तापमान में वृद्धि और सूखा: लंबे समय तक बारिश न होने और तापमान में लगातार बढ़ोतरी के कारण बुग्यालों के आग की चपेट में आने का जोखिम काफी बढ़ गया है।
3. सीसीएफ (वनाग्नि) सुशांत पटनायक का वक्तव्य
वन विभाग के मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ – वनाग्नि) सुशांत पटनायक के अनुसार:
”अध्ययन के जरिए यह समझने की कोशिश होगी कि वनाग्नि का दायरा उच्च हिमालयी क्षेत्रों तक कैसे और क्यों बढ़ रहा है। यदि कुछ नए क्षेत्र संवेदनशील पाए जाते हैं, तो वहां पहले से ही सुरक्षा और त्वरित नियंत्रण की व्यवस्था विकसित की जाएगी।”
