उत्तराखंड में 12 साल बाद शुरू हुई नंदा देवी की बड़ी जात, कुरुड़ से कैलाश रवाना हुई यात्रा
उत्तराखंड में 12 साल बाद शुरू हुई नंदा देवी की बड़ी जात, कुरुड़ से कैलाश रवाना हुई यात्रा
चमोली/गोपेश्वर, 5 सितंबर 2026: उत्तराखंड की आराध्य देवी मां नंदा की 12 वर्षीय बड़ी जात यात्रा शनिवार को चमोली जिले के सिद्धपीठ कुरुड़ स्थित नंदा धाम से कैलाश के लिए रवाना हो गई। ढोल-नगाड़ों और ‘जय मां नंदा’ के जयकारों के बीच तीनों डोलियां मायके से ससुराल की ओर बढ़ चलीं। हजारों श्रद्धालुओं ने विदाई का भावुक पल देखा।
इस यात्रा को पहाड़ का महाकुंभ भी कहा जाता है। करीब 280-296 किलोमीटर लंबी यह पैदल यात्रा लगभग 20 दिनों तक चलेगी। इसमें 21 आबादी वाले और 5 निर्जन पड़ाव शामिल हैं। यात्रा की अगुआई सुंग गांव के चौसिंग्या खाडू (चार सींग वाला मेढ़ा) कर रहा है, जिसे 20 सितंबर को होमकुंड में मां नंदा के साथ कैलाश के लिए विदा किया जाएगा।
आज की स्थिति
बधाण की डोली चरबंगा की ओर रवाना हुई।
दसौली की डोली कुमजुग की ओर बढ़ रही है।
बंड की डोली कल चमोली मार्केट पहुंचेगी।
यात्रा होमकुंड (त्रिशूल पर्वत की तलहटी, लगभग 17,500 फीट) में पूजा-अर्चना के साथ समापन की ओर बढ़ेगी। इसके बाद डोलियां विभिन्न पड़ावों से होते हुए वापस लौटेंगी।
विशेष बात
इस साल कुरुड़ पक्ष ने बड़ी जात निकाली है, जबकि नौटी पक्ष 2027 में राजजात निकालने का ऐलान कर चुका है। विवाद के बावजूद कुरुड़ से यात्रा स्थानीय स्तर पर भव्य रूप में शुरू हुई। प्रवासी और धियाणियां (ब्याहता बेटियां) बड़ी संख्या में गांव लौटे हैं।
मां नंदा की यह यात्रा हिमालयी आस्था, संस्कृति और समुदाय की एकता का प्रतीक मानी जाती है। श्रद्धालुओं में उत्साह चरम पर है।
