गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों पर धामी सरकार का सख्त एक्शन: देहरादून और हल्द्वानी में बड़ी कार्रवाई; प्रदेश भर में 20 अवैध मदरसे बंद
गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों पर धामी सरकार का सख्त एक्शन: देहरादून और हल्द्वानी में बड़ी कार्रवाई; प्रदेश भर में 20 अवैध मदरसे बंद
देहरादून/हल्द्वानी: उत्तराखंड में शैक्षणिक मानकों और वैध मान्यता के बिना संचालित हो रहे मदरसों के खिलाफ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों पर राज्य सरकार की सख्त कार्रवाई जारी है। शनिवार को देहरादून और नैनीताल (हल्द्वानी) जिलों में संयुक्त कार्रवाई करते हुए बिना पंजीकरण और मान्यता के चल रहे मदरसों को सील किया गया।
राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में अब तक ऐसे 20 गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों का संचालन पूरी तरह बंद कराया जा चुका है।
1. देहरादून: 1 मदरसा सील, 2 प्रबंधकों ने संचालन बंद करने की दी अंडरटेकिंग
अल्पसंख्यक मामलों के सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने देहरादून में हुई कार्रवाई की विस्तृत जानकारी साझा की:
मदरसा सील: आजाद कॉलोनी स्थित मदरसा जामिया-तुस-सलाम अल-इस्लामिया को जांच में अनियमतता मिलने पर सील कर दिया गया।
लिखित अंडरटेकिंग (सहमति पत्र): माजरा स्थित मदरसा दार-ए-अरकम और मदरसा दारूल उलूम रहीमिया के प्रबंधकों ने स्वयं स्वीकार किया कि उनके पास वैध मान्यता नहीं है और उन्होंने मदरसों का संचालन बंद करने संबंधी लिखित अंडरटेकिंग प्रशासन को सौंपी।
राज्यव्यापी स्थिति: प्रदेश भर में अब तक 17 मदरसों को सील किया गया है, जबकि 3 मदरसों के प्रबंधकों ने लिखित रूप में स्वतः संचालन बंद करने की सूचना दी है।
2. हल्द्वानी: बनभूलपुरा और गौजाजाली में दो मदरसे सील
नैनीताल जिले के हल्द्वानी क्षेत्र में नगर मजिस्ट्रेट ए.बी. वाजपेयी के नेतृत्व में अवैध मदरसों पर शिकंजा कसा गया:
सील किए गए संस्थान: शनि बाजार रोड (गौजाजाली उत्तर) स्थित मदरसा जामिया नूरिया बरकाते आमिना तथा इंदिरा नगर (बनभूलपुरा) में संचालित एक अन्य गैर-मान्यता प्राप्त मदरसे को सील कर दिया गया।
दस्तावेज न देने पर कार्रवाई: सिटी मजिस्ट्रेट ने स्पष्ट किया कि प्रबंधकों को मान्यता से संबंधित आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत करने के लिए पर्याप्त समय दिया गया था। निर्धारित अवधि में दस्तावेज जमा न करने पर यह कानूनी कार्रवाई की गई।
3. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कड़ा संदेश
मानकों से कोई समझौता नहीं: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कड़े शब्दों में कहा है कि राज्य में किसी भी शैक्षणिक संस्थान को बिना वैध मान्यता और निर्धारित नियमों के चलने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर जोर: सरकार की नई व्यवस्था का उद्देश्य अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में बच्चों को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।
