लाइफ स्टाइल

भारत में युवाओं को शिकार बना रहीं 5 प्रमुख लाइफस्टाइल बीमारियां: क्यों ’40’ बन रहा है नया ’60’

भारत में युवाओं को शिकार बना रहीं 5 प्रमुख लाइफस्टाइल बीमारियां: क्यों ’40’ बन रहा है नया ’60’

​नई दिल्ली: भारत में खराब जीवनशैली, असंतुलित खान-पान और शारीरिक निष्क्रियता के कारण गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का आगमन 15-20 वर्ष पहले ही होने लगा है। जो बीमारियां पहले 60 वर्ष की आयु के बाद देखने को मिलती थीं, वे अब 30 से 40 वर्ष के युवाओं में तेजी से फैल रही हैं। डॉक्टरों का कहना है कि सिर्फ बॉडी मास इंडेक्स (BMI) या वजन सामान्य होना पूर्ण स्वास्थ्य की गारंटी नहीं है; दुबले दिखने वाले व्यक्तियों में भी आंतरिक ‘मेटाबॉलिक’ गड़बड़ियां हो सकती हैं।

​युवाओं में तेजी से बढ़ रही 5 मुख्य स्वास्थ्य समस्याएं

​1. टाइप 2 डायबिटीज और इंसुलिन रेजिस्टेंस:

​भारत में इंसुलिन रेजिस्टेंस का खतरा अब 30-40 वर्ष की उम्र में ही बढ़ रहा है।

​’टोफी’ (TOFI – Thin Outside, Fat Inside) यानी बाहर से दुबले दिखने वाले लोगों के शरीर के अंदर छिपा ‘विसरल फैट’ और हाई शुगर उन्हें प्रीडायबिटीज और टाइप 2 डायबिटीज की ओर धकेल रहा है।

​2. फैटी लिवर रोग (Non-Alcoholic Fatty Liver Disease):

​विशेष रूप से दिल्ली-एनसीआर और कॉरपोरेट दफ्तरों में काम करने वाले 20 से 30 वर्ष के युवा इसकी चपेट में आ रहे हैं।

​देर रात तक काम, जंक फूड और गतिहीन जीवनशैली के कारण कम उम्र में ही लिवर में वसा का जमाव हो रहा है।

​3. कम उम्र में हार्ट अटैक और हाई कोलेस्ट्रॉल:

​30-40 की उम्र में धमनियों में रुकावट, हाई कोलेस्ट्रॉल और हाई एलपी (a) के मामले तेजी से बढ़े हैं।

​धमनियों में लंबे समय तक रहने वाली सूजन (Inflammation) युवाओं में असमय दिल का दौरा (Heart Attack) पड़ने का मुख्य कारण बन रही है।

​4. हार्मोनल असंतुलन (PCOS, टेस्टोस्टेरोन और थायराइड):

​मेटाबॉलिक गड़बड़ी और इंसुलिन रेजिस्टेंस का सीधा असर हार्मोनल हेल्थ पर पड़ रहा है।

​महिलाओं में पीसीओएस (PCOS) और पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन के स्तर में गिरावट के साथ-साथ थायराइड की समस्याएं युवाओं में आम हो गई हैं।

​5. हाई ब्लड प्रेशर और हाइपरटेंशन:

​मानसिक तनाव, कम नींद और नमक के अत्यधिक सेवन के कारण 30 की उम्र पार करते ही बड़ी संख्या में युवा उच्च रक्तचाप (Hypertension) का शिकार हो रहे हैं, जिससे किडनी और हार्ट दोनों पर जोखिम बढ़ रहा है।

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