उत्तराखंड हाईकोर्ट शिफ्टिंग मामले में याचिका खारिज, बेलबाबा में निर्माण का रास्ता साफ
उत्तराखंड हाईकोर्ट शिफ्टिंग मामले में याचिका खारिज, बेलबाबा में निर्माण का रास्ता साफ
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट को नैनीताल से हल्द्वानी के बेलबाबा क्षेत्र में स्थानांतरित करने और बिना केंद्र सरकार की अनुमति के भूमि आरक्षित किए जाने के आरोपों को लेकर दायर याचिका पर हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है। दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद खंडपीठ ने पूर्व में सुरक्षित रखे गए निर्णय को सुनाते हुए याचिका खारिज कर दी।
इस फैसले के बाद बेलबाबा क्षेत्र में हाईकोर्ट को स्थानांतरित करने की प्रक्रिया को लेकर सरकार को बड़ी राहत मिली है। हालांकि, शिफ्टिंग का विरोध कर रहे अधिवक्ताओं ने फैसले पर असहमति जताई है। अब इस मामले को सुप्रीम कोर्ट या राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के समक्ष चुनौती दिए जाने की संभावना है।
रिजर्व फॉरेस्ट की जमीन को लेकर उठाए थे सवाल
यह याचिका राज्य आंदोलनकारी अधिवक्ता रमन शाह समेत अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं का मुख्य तर्क था कि नैनीताल जिलाधिकारी की ओर से हाईकोर्ट के निर्माण के लिए बेलबाबा मंदिर के पास रिजर्व फॉरेस्ट की जमीन का प्रस्ताव तैयार किया गया है, जो वन संरक्षण अधिनियम, 1980 की धारा-2 के प्रावधानों के विपरीत है।
याचिका में दावा किया गया था कि प्रस्तावित क्षेत्र हाथी कॉरिडोर के अंतर्गत आता है और वहां बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण भी किया गया है। याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के 15 जुलाई 2026 के आदेश और राज्य सरकार की 12 अगस्त 2026 की अधिसूचना का हवाला देते हुए कहा कि संबंधित भूमि ‘फॉरेस्ट लैंड’ है। उनका तर्क था कि ऐसी भूमि को केंद्र सरकार की अनिवार्य कानूनी मंजूरी के बिना हस्तांतरित या डी-रिजर्व नहीं किया जा सकता।
सरकार ने दलीलों को किया खारिज
दूसरी ओर, राज्य सरकार की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने याचिकाकर्ताओं के तर्कों का विरोध किया। सरकार ने अदालत को बताया कि हाईकोर्ट को स्थानांतरित करने की प्रक्रिया नियमानुसार आगे बढ़ाई जा रही है।
सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि हाईकोर्ट के लिए प्रस्तावित बेलबाबा क्षेत्र हाथी कॉरिडोर नहीं है। दोनों पक्षों की दलीलों और रिकॉर्ड पर उपलब्ध तथ्यों का अवलोकन करने के बाद अदालत ने याचिका को निरस्त कर दिया।
शिफ्टिंग के विरोध में दाखिल याचिकाकर्ताओं को झटका
न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की खंडपीठ के इस फैसले से नैनीताल से बेलबाबा में हाईकोर्ट स्थानांतरण का विरोध कर रहे याचिकाकर्ताओं को झटका लगा है।
हालांकि, विरोध कर रहे अधिवक्ताओं ने फैसले से असहमति जताई है। ऐसे में हाईकोर्ट के इस निर्णय को आगे सुप्रीम कोर्ट या एनजीटी में चुनौती दिए जाने की संभावना बनी हुई है।
