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सरला भट हत्याकांड में यासीन मलिक ने भूमिका से किया इनकार, कहा- मुकदमा नहीं लड़ूंगा और मौत की सजा चाहता हूं

सरला भट हत्याकांड में यासीन मलिक ने भूमिका से किया इनकार, कहा- मुकदमा नहीं लड़ूंगा और मौत की सजा चाहता हूं

प्रतिबंधित जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के प्रमुख यासीन मलिक ने 1990 में कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट के अपहरण और हत्या के मामले में अपनी किसी भी भूमिका से इनकार किया है। तिहाड़ जेल में बंद मलिक ने बुधवार, 2 सितंबर 2026 को श्रीनगर की अतिरिक्त सत्र अदालत में अपने वकील के जरिए 25 पन्नों का हलफनामा दाखिल किया। इसमें उन्होंने खुद को निर्दोष बताते हुए मुकदमे का सामना नहीं करने और अपने लिए मौत की सजा की मांग की है।

‘हत्या के समय गंभीर रूप से घायल था’

मलिक ने हलफनामे में दावा किया कि अप्रैल 1990 में सरला भट की हत्या के समय वह गंभीर रूप से घायल और बेहोश थे तथा उनका इलाज चल रहा था। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में उनके लिए किसी अपराध की साजिश रचना या उसका निर्देश देना संभव नहीं था।

मलिक ने यह भी कहा कि उन्होंने ‘इस्तखारा’ किया था, जिसे इस्लामिक परंपरा में किसी महत्वपूर्ण फैसले से पहले मार्गदर्शन मांगने की प्रार्थना माना जाता है। इसके बाद उन्होंने ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही का विरोध नहीं करने का फैसला लिया। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि यह फैसला अपराध स्वीकार करने या अभियोजन के आरोपों को मानने के बराबर नहीं है।

SIA ने दाखिल की 737 पन्नों की चार्जशीट

शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SKIMS) में कार्यरत 27 वर्षीय नर्स सरला भट का 18 अप्रैल 1990 को आतंकवादियों ने अपहरण कर लिया था और बाद में उनकी हत्या कर दी गई थी। जून 2026 में जम्मू-कश्मीर राज्य जांच एजेंसी (SIA) ने मामले में 737 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की, जिसमें यासीन मलिक समेत कई लोगों को आरोपी बनाया गया।

मलिक ने अभियोजन पक्ष के उन दावों पर भी सवाल उठाए, जिनमें घटनास्थल से कथित तौर पर मिले 36 साल पुराने हाथ से लिखे JKLF नोट का उल्लेख है। उन्होंने पूछा कि 1990 में हुई शुरुआती जांच में उनका नाम क्यों नहीं आया। उन्होंने सरला भट के सुरक्षा बलों की मुखबिर होने के दावे को भी खारिज करते हुए उन्हें निर्दोष नागरिक बताया।

‘राजनीतिक परिस्थितियों के कारण फंसाया गया’

मलिक ने कहा कि घटना के तीन दशक से अधिक समय बाद चार्जशीट में आरोपी बनाए जाने से उन्हें हैरानी हुई। उन्होंने अदालत और जांच एजेंसियों के प्रति किसी शिकायत से इनकार करते हुए दावा किया कि पूरी कार्रवाई राजनीतिक परिस्थितियों और फैसलों का परिणाम है तथा उन्हें गलत तरीके से फंसाया गया है।

अलग-अलग मामलों में पहले से सजा काट रहे हैं मलिक

यासीन मलिक 2017 के टेरर फंडिंग मामले में 2022 में दोषी ठहराए जाने के बाद तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहा है। इसके अलावा 1989 में रुबैया सईद के अपहरण और 1990 में भारतीय वायुसेना के चार कर्मियों की हत्या से जुड़े मामलों में भी उसके खिलाफ मुकदमे चल रहे हैं।

सरला भट हत्याकांड में अभियोजन पक्ष के जवाब के लिए अदालत ने 19 सितंबर 2026 की तारीख तय की है।

पाकिस्तानी पत्नी से अलग होने की बात कही

अपने हलफनामे में मलिक ने अपनी पाकिस्तानी पत्नी मुशाल हुसैन मलिक से अलग होने के फैसले का भी उल्लेख किया। उसने कहा कि वह नहीं चाहता कि उसकी पत्नी उसकी मौजूदा कानूनी स्थिति का बोझ उठाए या उसकी विधवा बनकर रहे।

 

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