Thursday, September 3, 2026
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CPI की राष्ट्रीय महासचिव अमरजीत कौर का PM मोदी पर विवादित बयान: बीजेपी का ‘नक्सली सोच’ का आरोप, कौर का माफी मांगने से इनकार

CPI की राष्ट्रीय महासचिव अमरजीत कौर का PM मोदी पर विवादित बयान: बीजेपी का ‘नक्सली सोच’ का आरोप, कौर का माफी मांगने से इनकार

​नई दिल्ली: भारतीय राजनीति में एक बार फिर विवादित बयानबाजी को लेकर सियासी घमासान छिड़ गया है। कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (CPI) की राष्ट्रीय महासचिव अमरजीत कौर द्वारा दिल्ली में एक रैली के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दिए गए बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) आक्रामक रूप में आ गई है।

​1. विवादित बयान और पृष्ठभूमि

​अमरजीत कौर का बयान: दिल्ली में आयोजित एक रैली को संबोधित करते हुए 74 वर्षीय CPI नेता अमरजीत कौर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने PM मोदी की पुरानी टिप्पणी—जिसमें कम्युनिस्टों और उनके ‘लाल झंडे’ को खतरनाक बताया गया था—का जिक्र करते हुए विवादास्पद बयान दिया।

​15 अगस्त का संदर्भ: उल्लेखनीय है कि 15 अगस्त को लाल किले के प्राचीर से PM मोदी ने कहा था कि नक्सलवाद और माओवाद ने युवाओं का भविष्य बर्बाद किया है तथा देश को सशस्त्र नक्सलवाद से ज्यादा “दिमागी (अर्बन) नक्सलियों” से खतरा है।

​2. बीजेपी का पलटवार: ‘दिमागी नक्सली सोच’

​प्रदीप भंडारी का हमला: बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने अमरजीत कौर के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कौर की मानसिकता को “दिमागी नक्सली सोच” करार दिया और कहा कि ऐसे बयानों के कारण ही देश की जनता CPM/CPI से नफरत करती है।

​माफी की मांग: बीजेपी ने CPI महासचिव से उनके बयान पर देश और प्रधानमंत्री से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है।

​3. अमरजीत कौर का माफी से इनकार

​बीजेपी के हमलों के बावजूद अमरजीत कौर ने अपने रुख पर कायम रहते हुए माफी मांगने से साफ इनकार कर दिया है:

​कौर का तर्क: अमरजीत कौर ने कहा, “मैंने जो कुछ भी कहा, मैं उस पर पूरी तरह कायम हूं और माफी नहीं मांगूंगी। अगर प्रधानमंत्री सार्वजनिक रूप से यह कह सकते हैं कि कम्युनिस्टों को खत्म कर दो, तो मेरे बयान पर सवाल क्यों उठाया जा रहा है?”

​4. कौन हैं अमरजीत कौर?

​शैक्षणिक व छात्र पृष्ठभूमि: M.Sc और LL.B की पढ़ाई करने वाली अमरजीत कौर छात्र जीवन से ही वामपंथी राजनीति से जुड़ी रही हैं।

​संगठनात्मक अनुभव: वह 1979 से लगातार 7 वर्षों तक अखिल भारतीय छात्र संघ (AISF) की दूसरी महिला महासचिव रहीं।

​महत्वपूर्ण पद: 1999-2002 तक वे ‘राष्ट्रीय भारतीय महिला संघ’ की महासचिव और 1994 से 2017 तक ‘AITUC’ की राष्ट्रीय सचिव रहीं। 1972 में महंगाई विरोधी आंदोलन के दौरान उन्हें 10 दिनों की जेल भी हुई थी।

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