सुप्रीम कोर्ट का BCI के पुनर्गठन पर बड़ा निर्देश: नीतिगत फैसलों में AG और SG की मंजूरी अनिवार्य, 5 साल के कार्यकाल पर उठाए सवाल
सुप्रीम कोर्ट का BCI के पुनर्गठन पर बड़ा निर्देश: नीतिगत फैसलों में AG और SG की मंजूरी अनिवार्य, 5 साल के कार्यकाल पर उठाए सवाल
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के कामकाज और पुनर्गठन को लेकर बुधवार को कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने स्पष्ट किया कि जब तक नए सिरे से निर्वाचित BCI का गठन नहीं हो जाता, तब तक BCI के सभी महत्वपूर्ण नीतिगत फैसलों को अटॉर्नी जनरल (AG) आर. वेंकटरमणी और सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता के समक्ष रखना अनिवार्य होगा और उन्हें बैठकों में आमंत्रित किया जाएगा।
1. राज्य बार काउंसिलों को 2 सप्ताह का अल्टीमेटम
प्रतिनिधियों का चुनाव: जिन राज्य बार काउंसिलों का नए सिरे से गठन हो चुका है, उन्हें अधिसूचना की तारीख से 2 सप्ताह के भीतर वैधानिक पदाधिकारियों तथा BCI के लिए अपने-अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करने का निर्देश दिया गया है।
अनुपालन रिपोर्ट: सभी राज्य बार काउंसिलों को इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report) दाखिल करनी होगी, जिसके बाद कोर्ट BCI के पुनर्गठन पर विचार करेगा।
2. BCI चेयरमैन के 5 साल के कार्यकाल पर कोर्ट के सख्त सवाल
कार्यकाल बढ़ाने पर आपत्ति: याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि BCI नियमों के तहत चेयरमैन और वाइस चेयरमैन का कार्यकाल 2 वर्ष का है, जिसे अप्रैल 2025 की एक अधिसूचना के जरिए बढ़ाकर 5 वर्ष (2030 तक) कर दिया गया।
कानूनी प्रावधान पर सवाल: जस्टिस जॉयमाल्या बागची और CJI सूर्यकांत ने टिप्पणी की कि यदि BCI Rule 12(2) के तहत कार्यकाल 2 साल निर्धारित है, तो केवल एक अधिसूचना के जरिए इसे 5 साल कैसे किया जा सकता है? हालांकि, कोर्ट ने फिलहाल चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के खिलाफ कोई प्रतिकूल आदेश न देकर पुनर्गठन प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित किया है।
3. ‘PEARL Trust’ में स्थायी ट्रस्टीशिप पर घेरा
निजी ट्रस्ट बनाने पर सवाल: वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने आरोप लगाया कि BCI द्वारा बनाए गए ‘PEARL Trust’ में कुछ सदस्यों को स्थायी प्रबंध न्यासी बनाया गया है, जो BCI की सदस्यता समाप्त होने के बाद भी पद पर बने रह सकते हैं।
अदालत का रुख: पीठ ने सवाल उठाया कि एक निर्वाचित संस्था (BCI) के सदस्य उसकी संपत्तियों का इस्तेमाल कर खुद के लिए स्थायी ट्रस्टीशिप वाला ट्रस्ट कैसे बना सकते हैं? पद छोड़ते ही ‘Ex-Officio’ ट्रस्टीशिप भी समाप्त होनी चाहिए।
4. CJI की स्पष्ट टिप्पणी: “व्यक्ति नहीं, संस्था प्राथमिकता”
CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि अदालत किसी एक व्यक्ति को निशाना नहीं बना रही है, बल्कि उसका ध्यान संस्था (BCI) के वैधानिक ढांचे को मजबूत करने पर है।
आगे की 3 प्रमुख प्रक्रियाएं:
राज्य बार काउंसिलों में Co-Option प्रक्रिया पूरी करना।
नए राज्य बार काउंसिलों के पदाधिकारियों का चुनाव।
प्रत्येक राज्य बार काउंसिल द्वारा BCI के लिए प्रतिनिधि का चुनाव।
