आस्था और अलौकिक ऊर्जा का केंद्र है कैंची धाम
आस्था और अलौकिक ऊर्जा का केंद्र है कैंची धाम: सीएम धामी ने साझा किया वीडियो, दर्शन की अपील
नैनीताल: उत्तराखंड की शांत वादियों में बसा श्री कैंची धाम केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि देश-विदेश के लाखों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था और आध्यात्मिक शांति का केंद्र बना हुआ है। नैनीताल जिले में भवाली-अल्मोड़ा मार्ग पर स्थित यह पवित्र आश्रम 20वीं सदी के महान संत नीम करोली बाबा (महाराज जी) की साधना और कर्मस्थली रहा है। मान्यता है कि बाबा के द्वार से कभी कोई भक्त खाली हाथ नहीं लौटता।
सीएम पुष्कर सिंह धामी ने की दर्शन की अपील
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर कैंची धाम का एक दिव्य वीडियो साझा करते हुए इसकी भव्यता की सराहना की। उन्होंने लिखा, “नैनीताल जिले में मौजूद कैंची धाम बाबा नीम करोली महाराज जी की कठिन तपस्या की पवित्र भूमि है। पहाड़ों की शांत घाटियों में बसा यह धाम अलौकिक ऊर्जा और मानसिक शांति का अनूठा अनुभव देता है। नैनीताल आने वाले सभी श्रद्धालु बाबा के इस पावन धाम के दर्शन जरूर करें।”
’कैंची धाम’ नाम के पीछे का इतिहास
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, दो पहाड़ियों के बीच घुमावदार मोड़ों (कैंची के आकार) की घाटी में स्थित होने के कारण इस जगह को ‘कैंची धाम’ नाम मिला। आश्रम की स्थापना नीम करोली बाबा द्वारा 1960 के दशक में की गई थी, और 15 जून 1964 को वैदिक मंत्रोच्चार के साथ इसका औपचारिक उद्घाटन हुआ।
जंगल से आध्यात्मिक केंद्र बनने का सफर
प्राचीन समय में यह स्थान एक घना जंगल हुआ करता था, जहां संत सोमवारी महाराज और प्रेमी बाबा साधना किया करते थे। बाद में जब बाबा नीम करोली महाराज यहां पहुंचे, तो उन्होंने यहां की अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा को महसूस किया। इसके बाद स्थानीय निवासी पूर्णानंद द्वारा दान की गई भूमि पर आश्रम और हनुमान जी के मुख्य मंदिर का निर्माण कराया गया। आज यह पावन धरा दुनिया भर से आत्मिक शांति की तलाश में आने वाले साधकों को अपनी ओर आकर्षित करती है।
