बिश्केक में 26वें SCO शिखर सम्मेलन में शामिल हुए पीएम मोदी, आतंकवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा पर रखा भारत का पक्ष
बिश्केक में 26वें SCO शिखर सम्मेलन में शामिल हुए पीएम मोदी, आतंकवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा पर रखा भारत का पक्ष
बिश्केक/नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के 26वें शिखर सम्मेलन में भाग लिया। संगठन की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित इस सम्मेलन में पीएम मोदी ने आतंकवाद, क्षेत्रीय सुरक्षा, बेहतर कनेक्टिविटी और आपसी सहयोग को लेकर भारत का दृष्टिकोण वैश्विक मंच पर रखा।
विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि शिखर सम्मेलन के दौरान ऐतिहासिक ‘बिश्केक घोषणापत्र’ के साथ-साथ 4 समझौता ज्ञापनों और 20 से अधिक महत्वपूर्ण फैसलों और बयानों को अपनाया गया।
अंग्रेजी को आधिकारिक भाषा बनाने समेत भारत की कई पहलों को मिली जगह
सिबी जॉर्ज के अनुसार, भारत ने कई महत्वपूर्ण पहलों का नेतृत्व किया जिन्हें बिश्केक घोषणा-पत्र में शामिल किया गया है। इनमें सबसे प्रमुख एससीओ चार्टर में अंग्रेजी को आधिकारिक भाषा के रूप में शामिल करना है। इसके अलावा सभ्यता संवाद मंच, युवा वैज्ञानिक मंच और युवा लेखक सम्मेलन जैसी भारतीय पहलों को भी सराहा गया।
पीएम मोदी ने घोषणा की कि भारत इस वर्ष के अंत में पहले ‘एससीओ सभ्यता संवाद मंच’ (SCO Civilization Dialogue Forum) की मेजबानी करेगा, जिसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सांस्कृतिक और सभ्यतागत आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है।
आतंकवाद पर कड़ा संदेश और कूटनीति पर जोर
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कई महत्वपूर्ण बिंदु रेखांकित किए:
आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता: पीएम मोदी ने आतंकवाद को पूरी मानवता के लिए गंभीर खतरा बताते हुए इसके पूरे इकोसिस्टम को ध्वस्त करने की मांग की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि आतंकवाद से लड़ाई में किसी भी तरह के दोहरे मापदंड स्वीकार्य नहीं होंगे।
संवाद और कूटनीति ही रास्ता: वैश्विक संघर्षों पर भारत का रुख दोहराते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी विवाद का समाधान युद्ध के मैदान में नहीं हो सकता; संवाद और कूटनीति ही एकमात्र रास्ता है।
संप्रभुता का सम्मान: कनेक्टिविटी और व्यापारिक पहलों का समर्थन करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि सभी कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स में देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान होना अनिवार्य है।
अफगानिस्तान में स्थिरता: उन्होंने यूरेशिया क्षेत्र की सुरक्षा को अफगानिस्तान की शांति से जोड़ते हुए वहां भारत द्वारा दी जा रही मानवीय और विकासात्मक सहायता का उल्लेख किया।
प्रधानमंत्री ने किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सदिर जापारोव को सफल आयोजन और बेहतरीन आतिथ्य के लिए धन्यवाद दिया और विश्वास जताया कि भारत एससीओ परिवार के साथ मिलकर साझा समृद्धि के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।
