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मनोज बाजपेयी पहली बार निभाएंगे महात्मा गांधी का किरदार, अनुभव सिन्हा और सुधीर मिश्रा की फिल्म में दिखेगा आजादी के दौर का अनकहा अध्याय

मनोज बाजपेयी पहली बार निभाएंगे महात्मा गांधी का किरदार, अनुभव सिन्हा और सुधीर मिश्रा की फिल्म में दिखेगा आजादी के दौर का अनकहा अध्याय

मुंबई: भारतीय सिनेमा में स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े एक कम चर्चित अध्याय को बड़े पर्दे पर लाने की तैयारी है। फिल्म निर्माता अनुभव सिन्हा और निर्देशक सुधीर मिश्रा एक महत्वाकांक्षी ऐतिहासिक प्रोजेक्ट के लिए साथ आए हैं। फिल्म में तीन बार राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित अभिनेता मनोज बाजपेयी पहली बार महात्मा गांधी की भूमिका निभाते नजर आएंगे। उनके साथ अभिनेता सौरभ शुक्ला भी अहम किरदार में दिखाई देंगे।

गांधी जी के जीवन के उन 21 दिनों की कहानी

फिल्म की कहानी महात्मा गांधी के जीवन के एक ऐसे दौर पर आधारित है, जिसका इतिहास में अपेक्षाकृत कम जिक्र मिलता है। कहानी आजादी के निर्णायक समय के उन 21 दिनों पर केंद्रित होगी, जब देश स्वतंत्रता की ओर बढ़ रहा था और दिल्ली सत्ता के प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रही थी।

निर्देशक सुधीर मिश्रा के मुताबिक, उस समय गांधी जी ने सत्ता के केंद्र से दूर जाने का एक अप्रत्याशित फैसला लिया था। फिल्म इसी फैसले के पीछे छिपे विचारों, परिस्थितियों और गांधी जी के आंतरिक मंथन को मानवीय नजरिए से सामने लाने की कोशिश करेगी।

पहली बार बापू के रूप में नजर आएंगे मनोज बाजपेयी

मनोज बाजपेयी के लिए यह भूमिका बेहद खास है। अभिनेता पहली बार पर्दे पर महात्मा गांधी का किरदार निभाएंगे। फिल्म में गांधी जी को केवल ऐतिहासिक व्यक्तित्व के रूप में नहीं, बल्कि एक संवेदनशील और गहराई से सोचने वाले इंसान के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश की जाएगी।

वहीं, सौरभ शुक्ला की मौजूदगी फिल्म के ऐतिहासिक और नाटकीय पक्ष को मजबूती देगी।

अनुभव सिन्हा और सुधीर मिश्रा की जोड़ी

इस प्रोजेक्ट की क्रिएटिव टीम भी इसे खास बनाती है। सामाजिक मुद्दों पर आधारित ‘मुल्क’ और ‘थप्पड़’ जैसी फिल्मों के लिए पहचाने जाने वाले अनुभव सिन्हा इसे अपने बैनर बनारस मीडिया वर्क्स के तहत प्रोड्यूस कर रहे हैं।

वहीं ‘हजारों ख्वाहिशें ऐसी’ और ‘धारावी’ जैसी फिल्मों के निर्देशक सुधीर मिश्रा फिल्म का निर्देशन करेंगे। अनुभव सिन्हा के साथ नरेंद्र हिरावत भी इसके निर्माता हैं, जबकि एनएच स्टूडियोज इसे प्रस्तुत करेगा।

फिल्म के जरिए स्वतंत्रता संग्राम की बड़ी घटनाओं से इतर उस दौर में महात्मा गांधी के व्यक्तिगत विचारों और उनके एक महत्वपूर्ण फैसले के पीछे की मानवीय कहानी को केंद्र में लाने की कोशिश की जाएगी।

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