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क्या पेट की सेहत का डिप्रेशन से है सीधा संबंध? जानिए Gut-Brain Axis क्या है

क्या पेट की सेहत का डिप्रेशन से है सीधा संबंध? जानिए Gut-Brain Axis क्या है

डिप्रेशन पेट से किसी संक्रमण की तरह फैलने वाली बीमारी नहीं है, लेकिन पेट और दिमाग के बीच मजबूत जैविक संबंध जरूर होता है। चिकित्सा विज्ञान में इसे ‘गट-ब्रेन एक्सिस’ (Gut-Brain Axis) कहा जाता है। इसके जरिए आंतों की स्थिति और मस्तिष्क के बीच लगातार संवाद होता रहता है।

कैसे जुड़ा है पेट और दिमाग?

सेरोटोनिन की भूमिका

सेरोटोनिन मूड, नींद और कई अन्य शारीरिक प्रक्रियाओं को प्रभावित करने वाला रसायन है। शरीर में इसका बड़ा हिस्सा आंतों में बनता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि पेट में बनने वाला सेरोटोनिन सीधे दिमाग में जाकर डिप्रेशन ठीक करता है। मस्तिष्क में सेरोटोनिन की भूमिका अलग और जटिल है।

Gut Microbiome का असर

आंतों में खरबों सूक्ष्मजीव मौजूद होते हैं। इनके संतुलन में बदलाव शरीर में सूजन, पाचन और प्रतिरक्षा जैसी प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकता है। शोध में गट माइक्रोबायोम और मानसिक स्वास्थ्य के बीच संबंध पाया गया है, हालांकि यह कहना अभी सही नहीं है कि खराब गट माइक्रोबायोम अकेले डिप्रेशन का कारण बनता है।

Vagus Nerve यानी पेट-दिमाग का संचार मार्ग

वागस नर्व शरीर के कई अंगों और मस्तिष्क के बीच संकेतों के आदान-प्रदान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। आंतों से मिलने वाले संकेत भी इस नेटवर्क का हिस्सा हैं।

किन चीजों से बिगड़ सकता है संतुलन?

लंबे समय तक बना रहने वाला तनाव

असंतुलित खान-पान

बहुत ज्यादा अल्ट्रा-प्रोसेस्ड भोजन

नींद की कमी

कुछ दवाओं, खासकर एंटीबायोटिक्स का अनावश्यक इस्तेमाल

शारीरिक गतिविधि की कमी

इनमें से कई कारक पाचन और मानसिक स्वास्थ्य दोनों को प्रभावित कर सकते हैं।

क्या समस्याएं हो सकती हैं?

गट और मानसिक स्वास्थ्य के बीच संबंध के कारण कुछ लोगों में एक साथ पेट की समस्याएं और मानसिक तनाव दिखाई दे सकते हैं। उदाहरण के लिए IBS वाले लोगों में चिंता या अवसाद के लक्षण अपेक्षाकृत अधिक देखे जाते हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर पेट की समस्या डिप्रेशन पैदा करती है।

गट और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर रखने के तरीके

दही, फल, सब्जियां, साबुत अनाज और फाइबर युक्त भोजन को आहार में शामिल करें।

पर्याप्त पानी पिएं।

नियमित शारीरिक गतिविधि करें।

नींद का नियमित समय बनाए रखें।

बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक्स न लें।

तनाव कम करने के लिए वॉक, योग, ध्यान या अन्य स्वस्थ गतिविधियां अपनाएं।

जरूरी बात: डिप्रेशन केवल पेट की समस्या नहीं है। इसके पीछे जैविक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कई कारण हो सकते हैं। अगर उदासी, रुचि खत्म होना, लगातार थकान, नींद या पढ़ाई/दैनिक काम में परेशानी जैसे लक्षण लगातार बने रहें, तो किसी डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से बात करना बेहतर है।

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