₹13 हजार करोड़ के ड्रग्स सिंडिकेट का कथित मास्टरमाइंड वीरेंद्र बसोया UAE से भारत लाया गया, अमित शाह ने बताया बड़ी उपलब्धि
₹13 हजार करोड़ के ड्रग्स सिंडिकेट का कथित मास्टरमाइंड वीरेंद्र बसोया UAE से भारत लाया गया, अमित शाह ने बताया बड़ी उपलब्धि
नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को बताया कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने कथित ड्रग्स सरगना वीरेंद्र सिंह बसोया को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से भारत लाने में सफलता हासिल की है। बसोया करीब ₹13 हजार करोड़ के ड्रग्स नेटवर्क से जुड़े मामले में आरोपी है।
अमित शाह ने सोशल मीडिया पोस्ट में इसे नशीले पदार्थों के खिलाफ सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति की दिशा में बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि विदेशों में छिपे ड्रग तस्करों का पता लगाकर उनके नेटवर्क को खत्म करने के प्रयास लगातार जारी हैं।
‘ड्रग तस्कर कहीं भी छिपें, कानून से नहीं बच सकते’
अमित शाह ने कहा कि जांच एजेंसियों ने अपराधी तक पहुंचने के लिए व्यापक स्तर पर जांच की और एक बार फिर साबित किया कि ड्रग तस्कर दुनिया के किसी भी हिस्से में छिप जाएं, भारतीय कानून की पकड़ से बच नहीं सकते।
बसोया को UAE से भारत लाए जाने के बाद अब जांच एजेंसियों को उससे सीधे पूछताछ करने का मौका मिलेगा। जांच में विदेशी संपर्कों, कथित वित्तीय लेनदेन और भारत में ड्रग्स की सप्लाई से जुड़े नेटवर्क की जानकारी जुटाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दिल्ली, पंजाब और गुजरात से सामने आया था बड़ा नेटवर्क
इस मामले की शुरुआत अक्टूबर 2024 में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की कार्रवाई से हुई थी। महिपालपुर एक्सटेंशन में छापेमारी के दौरान बड़ी मात्रा में संदिग्ध कोकीन और हाइड्रोपोनिक गांजा बरामद किया गया था।
इसके बाद दिल्ली के रमेश नगर और गुजरात के अंकलेश्वर में भी बड़ी बरामदगी हुई। जांच आगे बढ़ने पर अलग-अलग कार्रवाइयों में करीब 1,289 किलो कोकीन/मेफेड्रोन और लगभग 39.7 किलो हाइड्रोपोनिक गांजा बरामद होने की बात सामने आई।
जांच एजेंसियों के अनुसार, इस नेटवर्क के तार भारत के अलावा दुबई, ब्रिटेन, मलेशिया, पाकिस्तान और थाईलैंड तक जुड़े होने के आरोप हैं।
बसोया को बताया गया कथित किंगपिन
जांच में वीरेंद्र सिंह बसोया उर्फ वीरू का नाम कथित तौर पर नेटवर्क के प्रमुख संचालकों में सामने आया। एजेंसियों के अनुसार, ड्रग्स को विदेश से भारत लाने और फिर अलग-अलग शहरों में पहुंचाने के लिए एक संगठित नेटवर्क का इस्तेमाल किया जाता था।
जांच में कुछ कंपनियों और कारोबारी ढांचे के इस्तेमाल का भी उल्लेख किया गया है। एजेंसियों का आरोप है कि दक्षिण अमेरिका से ड्रग्स को दुबई के रास्ते भारत लाया जाता था और फिर भारत में उसकी आगे सप्लाई की जाती थी।
सुरक्षित ऐप्स और क्रिप्टोकरेंसी के इस्तेमाल का आरोप
जांच एजेंसियों के मुताबिक, नेटवर्क में सामान्य फोन कॉल के बजाय कथित तौर पर एन्क्रिप्टेड संचार माध्यमों का इस्तेमाल किया जाता था। भुगतान के लिए क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल किए जाने की बात भी जांच में सामने आई है।
ड्रग्स की डिलीवरी के लिए अलग-अलग स्थानों पर पिकअप और डिलीवरी व्यवस्था बनाए जाने का आरोप है। पुलिस के अनुसार, ड्रग्स को अलग-अलग सामान और कंसाइनमेंट के बीच छिपाकर भेजा जाता था।
970 किलो मेफेड्रोन मामले में भी नाम आया
वीरेंद्र बसोया का नाम इससे पहले करीब 970 किलो मेफेड्रोन की बरामदगी से जुड़े मामले में भी सामने आया था। NCB की जांच के अनुसार, इस मामले में कुछ आरोपियों पर बसोया के निर्देश पर काम करने का आरोप लगाया गया था।
जांच एजेंसियों का दावा है कि यह खेप विदेश भेजने की कथित तैयारी में थी। इस मामले ने भी बसोया के कथित अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क को जांच के दायरे में ला दिया था।
परिवार के सदस्यों की भूमिका भी जांच के घेरे में
जांच के दौरान बसोया के भाई रविंदर बसोया और बेटे ऋषभ बसोया के नाम भी सामने आए। पुलिस ने कथित तौर पर कुछ वाहनों और संपर्कों को ड्रग्स की आवाजाही से जोड़कर जांच की।
ऋषभ बसोया के खिलाफ इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस जारी किए जाने की बात भी सामने आई थी। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश करेंगी कि कथित नेटवर्क में परिवार के सदस्यों और अन्य आरोपियों की वास्तविक भूमिका क्या थी।
अब आगे क्या होगी जांच?
UAE से भारत लाए जाने के बाद बसोया से पूछताछ इस मामले की जांच में अहम पड़ाव हो सकती है। एजेंसियों की जांच में कथित विदेशी संपर्क, ड्रग्स की सप्लाई का नेटवर्क, वित्तीय लेनदेन, दुबई कनेक्शन और अन्य आरोपियों की भूमिका प्रमुख बिंदु रहेंगे।
सरकार के मुताबिक, बसोया का भारत प्रत्यर्पण अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए ड्रग तस्करी के खिलाफ कार्रवाई की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में होने वाली न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
