करूर भगदड़: मृतकों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर लगाई रोक
करूर भगदड़: मृतकों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर लगाई रोक
नई दिल्ली: तमिलनाडु के करूर जिले में TVK की रैली के दौरान हुई भगदड़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को अंतरिम राहत दी है। शीर्ष अदालत ने मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच के उस फैसले पर फिलहाल रोक लगा दी है, जिसमें तमिलनाडु सरकार के सरकारी नौकरी देने संबंधी आदेश को रद्द कर दिया गया था।
करूर भगदड़ में गई थी 41 लोगों की जान
पिछले वर्ष 27 सितंबर को करूर के वेलुसामीपुरम में तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) की प्रचार सभा के दौरान भारी भीड़ के बीच भगदड़ मच गई थी। हादसे में 41 लोगों की मौत हुई थी।
घटना के बाद तमिलनाडु सरकार ने मृतकों के परिवारों की आर्थिक मदद के लिए प्रत्येक परिवार से एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का फैसला किया था। सरकार ने इसके लिए नियुक्ति आदेश भी जारी किए थे।
हाईकोर्ट ने क्यों रद्द किया था सरकारी आदेश?
सरकार के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने सरकारी आदेश को रद्द करते हुए कहा था कि अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी देने के लिए निर्धारित कानूनी मानकों का पालन जरूरी है।
अदालत ने माना था कि केवल किसी दुर्घटना में परिवार के सदस्य की मौत हो जाने के आधार पर सीधे सरकारी नौकरी देना नियमों के अनुरूप नहीं माना जा सकता। प्रभावित परिवारों की सहायता के लिए कौशल विकास, रोजगार सहायता और पुनर्वास जैसे दूसरे विकल्प अपनाए जा सकते हैं।
तमिलनाडु सरकार पहुंची सुप्रीम कोर्ट
हाईकोर्ट के फैसले के बाद तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की। राज्य सरकार का तर्क था कि नियुक्तियां मानवीय आधार पर और प्रभावित परिवारों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए की गई थीं।
सरकार ने कहा कि करूर हादसे से प्रभावित परिवारों के भविष्य और आजीविका को ध्यान में रखते हुए यह विशेष कदम उठाया गया था।
सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल राहत
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान मद्रास हाईकोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। इससे फिलहाल राज्य सरकार के सरकारी नौकरी देने संबंधी आदेश पर हाईकोर्ट के फैसले का असर नहीं रहेगा।
हालांकि, यह अंतिम फैसला नहीं है। सुप्रीम कोर्ट आगे इस महत्वपूर्ण कानूनी सवाल पर विचार करेगा कि असाधारण परिस्थितियों में किसी बड़े हादसे में मृतकों के आश्रितों को मानवीय आधार पर सीधे सरकारी नौकरी देने की सरकार की शक्ति और उसकी संवैधानिक सीमा क्या है।
फिलहाल करूर भगदड़ के पीड़ित परिवारों के लिए सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश अंतरिम राहत के तौर पर देखा जा रहा है।
