NALSAR विवाद पर मनन मिश्रा का जवाब, कहा- ‘छात्रों का हित सबसे ऊपर’, CJP नेताओं से बातचीत को तैयार
NALSAR विवाद पर मनन मिश्रा का जवाब, कहा- ‘छात्रों का हित सबसे ऊपर’, CJP नेताओं से बातचीत को तैयार
नई दिल्ली: बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) और NALSAR यूनिवर्सिटी के छात्रों के बीच हुए विवाद को लेकर उठे सवालों पर BCI अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के अभिजीत दीपके और सौरव दास ने इस मामले में मनन मिश्रा के इस्तीफे की मांग की थी। अब मिश्रा ने कहा है कि वह दोनों नेताओं से बातचीत के लिए तैयार हैं और छात्रों के हितों को सबसे अधिक प्राथमिकता देते हैं।
‘छात्रों के हितों की रक्षा करना मेरी जिम्मेदारी’
मनन मिश्रा ने कहा कि BCI और छात्र अधिकार कार्यकर्ताओं के उद्देश्यों में कोई टकराव नहीं है। उनके मुताबिक, दोनों का लक्ष्य कानून के छात्रों और युवाओं के अधिकारों की रक्षा करना है।
उन्होंने कहा कि वह अभिजीत दीपके और सौरव दास से बातचीत करने से नहीं कतराते। उनके अनुसार, NALSAR के 2026 बैच के छात्रों के नामांकन को लेकर जारी किया गया आदेश बाद में वापस ले लिया गया, क्योंकि काउंसिल ने माना कि वह छात्रों के हित में नहीं था।
मिश्रा ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में अब कोई जांच नहीं होगी। उन्होंने कहा कि छात्रों के हित सर्वोच्च हैं और जरूरत पड़ने पर वह CJP नेताओं से सीधे बातचीत कर पूरे मामले को समझाने के लिए तैयार हैं।
‘14 करोड़ रुपये खर्च होने की जानकारी नहीं’
BCI के कामकाज से जुड़े 14 करोड़ रुपये खर्च किए जाने के आरोप पर मनन मिश्रा ने कहा कि उन्हें इस बारे में जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि BCI की ओर से समय-समय पर विभिन्न सेमिनार आयोजित किए जाते हैं, लेकिन 14 करोड़ रुपये कहां खर्च हुए, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है।
उन्होंने कहा कि यदि इस मुद्दे पर कोई संचार संबंधी कमी या गलतफहमी है तो अभिजीत दीपके और सौरव दास के साथ बातचीत करके उसे स्पष्ट किया जा सकता है।
NALSAR छात्रों के नामांकन पर रोक से शुरू हुआ था विवाद
दरअसल, NALSAR यूनिवर्सिटी के 2026 बैच के छात्रों के वकालत में नामांकन को लेकर BCI के एक आदेश के बाद विवाद खड़ा हुआ था। छात्रों के एक समूह ने विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में भारत के मुख्य न्यायाधीश को मुख्य अतिथि बनाए जाने का विरोध किया था।
इसके बाद BCI ने कुछ समय के लिए छात्रों के नामांकन पर रोक लगाने का निर्देश दिया था। हालांकि बाद में इस आदेश को वापस ले लिया गया और स्पष्ट किया गया कि छात्रों के नामांकन पर रोक नहीं रहेगी।
CJP ने की थी इस्तीफे की मांग
CJP के अभिजीत दीपके और सौरव दास ने BCI की कार्रवाई का विरोध करते हुए मनन मिश्रा के इस्तीफे की मांग की थी। उनका कहना था कि छात्रों को किसी सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति की विश्वविद्यालय कार्यक्रम में मौजूदगी का शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने का लोकतांत्रिक अधिकार है।
CJP नेताओं का तर्क था कि असहमति जताने वाले छात्रों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए जिससे उनके करियर पर असर पड़े।
अब मनन मिश्रा ने भी बातचीत का रास्ता खुला रखा है। उनका कहना है कि BCI और छात्र अधिकार कार्यकर्ताओं का अंतिम उद्देश्य छात्रों के हितों की रक्षा करना ही है।
