लाल किला कार बम धमाके पर संयुक्त राष्ट्र (UNSC) का बड़ा खुलासा: हमले के पीछे था AQIS, छोटे आतंकी सेलों के जरिए नेटवर्क फैलाने की साजिश
लाल किला कार बम धमाके पर संयुक्त राष्ट्र (UNSC) का बड़ा खुलासा: हमले के पीछे था AQIS, छोटे आतंकी सेलों के जरिए नेटवर्क फैलाने की साजिश
नई दिल्ली: नवंबर 2025 में दिल्ली के लाल किले के पास हुए भीषण कार बम धमाके को लेकर एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय खुलासा हुआ है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की मॉनिटरिंग टीम की हालिया रिपोर्ट में पुष्टि की गई है कि इस हमले के तार ‘अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट’ (AQIS) और उसके सहयोगी संगठन ‘अंसार गजवत-उल-हिंद’ (AGuH) से जुड़े हुए थे।
1. UNSC की रिपोर्ट में हुए बड़े खुलासे
AQIS की नई रणनीति: रिपोर्ट के मुताबिक, AQIS अब बड़े आतंकी दस्तों के बजाय छोटे-छोटे और गुप्त ‘सेल्स’ बनाकर अपना नेटवर्क फैलाने की रणनीति पर काम कर रहा है।
बांग्लादेश को लेकर चिंता: UNSC ने चेतावनी दी है कि AQIS बांग्लादेश का इस्तेमाल नए आतंकी सेल खड़े करने, लॉजिस्टिक समर्थन जुटाने और वित्तीय नेटवर्क मजबूत करने के लिए कर रहा है।
2. NIA की चार्जशीट और ‘ऑपरेशन हेवेनली हिंद’
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने मई 2026 में इस मामले में पटियाला हाउस स्थित विशेष अदालत में करीब 7,500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें इस आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश किया गया था:
मास्टरमाइंड और DNA पहचान: हमले का मुख्य आरोपी डॉ. उमर उन नबी था, जो पुलवामा (जम्मू-कश्मीर) का रहने वाला था और फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर ऑफ मेडिसिन के रूप में कार्यरत था। धमाके में उसकी मौत हो गई थी, जिसकी पहचान DNA फिंगरप्रिंटिंग से हुई।
शिक्षित प्रोफेशनल्स का कट्टरपंथ: इस मॉड्यूल में कई मेडिकल प्रोफेशनल और डॉक्टर शामिल थे, जिन्हें AQIS/AGuH की विचारधारा से प्रेरित किया गया था।
’ऑपरेशन हेवेनली हिंद’: 2022 में श्रीनगर की एक गुप्त बैठक में AGuH को दोबारा पुनर्गठित कर ‘AGuH Interim’ बनाया गया था। आरोपियों का मकसद लोकतांत्रिक व्यवस्था को खत्म कर शरिया आधारित शासन स्थापित करना था।
3. विस्फोटक, ड्रोन IED और हथियारों की तैयारी
TATP विस्फोटक का इस्तेमाल: जांच में सामने आया कि धमाके के लिए Triacetone Triperoxide (TATP) नामक केमिकल विस्फोटक का इस्तेमाल किया गया था, जिसे बाजार से खरीदे गए रसायनों से तैयार किया गया था।
ड्रोन और रॉकेट परीक्षण: आरोपी AK-47, क्रिंकोव राइफल और देशी पिस्तौलों के अलावा ड्रोन व रॉकेट से लगाए जाने वाले IED पर प्रयोग कर रहे थे, ताकि देश के प्रमुख सुरक्षा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया जा सके।
देशव्यापी नेटवर्क: इस आतंकी मॉड्यूल का जाल जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली-NCR तक फैला हुआ था।
4. केस में अब तक की प्रगति
हताहतों का आंकड़ा: नवंबर 2025 में हुए इस कार बम धमाके में 11 लोगों की मौत हुई थी और कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।
गवाह और सबूत: NIA ने अपनी चार्जशीट में 588 गवाहों के बयान, 395 दस्तावेज और 200 से अधिक जब्त सामग्री को कोर्ट के समक्ष पेश किया है।
अब तक 11 गिरफ्तारियां: इस मामले में अब तक 11 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि फरार अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है।
