उत्तराखंड में मल्लिकार्जुन खड़गे के मंच के ‘शुद्धिकरण’ पर बवाल: कांग्रेस का बीजेपी और संघ समर्थित संगठनों के खिलाफ राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन
उत्तराखंड में मल्लिकार्जुन खड़गे के मंच के ‘शुद्धिकरण’ पर बवाल: कांग्रेस का बीजेपी और संघ समर्थित संगठनों के खिलाफ राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन
देहरादून/हल्द्वानी: उत्तराखंड में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के हल्द्वानी कार्यक्रम के बाद जनसभा मंच के ‘शुद्धिकरण’ का मामला गरमा गया है। इस घटना को दलित और पिछड़ा वर्ग विरोधी मानसिकता करार देते हुए कांग्रेस आज पूरे राज्य में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और संबंधित संगठनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रही है।
1. क्या है पूरा विवाद?
खड़गे की जनसभा: कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बीते 8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में एक बड़ी जनसभा को संबोधित किया था।
गंगाजल छिड़ककर शुद्धिकरण: खड़गे के जाने के बाद, 11 अगस्त को ‘श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास’ नामक संगठन के सदस्यों ने उस मंच पर जाकर गंगाजल छिड़ककर शुद्धिकरण किया।
विवाद की वजह: खड़गे दलित समुदाय से आते हैं, ऐसे में मंच के शुद्धिकरण को कांग्रेस ने सीधे तौर पर दलित समाज का अपमान और बीजेपी की संकीर्ण मानसिकता का परिचायक बताया है।
2. कांग्रेस नेताओं के तीखे हमले
पूर्व विधायक जीत राम टम्टा का बयान: उन्होंने इस कृत्य को बेहद निंदनीय बताते हुए कहा कि भाजपा ने इस प्रकार की नफरत और भेदभाव की राजनीति में महारत हासिल कर ली है। यह न सिर्फ कांग्रेस का अपमान है, बल्कि सामाजिक सौहार्द और लोकतांत्रिक मूल्यों पर भी हमला है।
कांग्रेस एससी विभाग के अध्यक्ष मदनलाल का हमला:
मदनलाल ने कहा कि केवल बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा के माफी मांगने से मामला खत्म नहीं हो जाता।
उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और नैनीताल पुलिस प्रशासन इस मामले में आंखें मूंदकर बैठे हैं।
उन्होंने कहा कि यह केवल खड़गे जी का अपमान नहीं, बल्कि देश के करोड़ों दलितों और हाशिए पर खड़े समाज के स्वाभिमान की लड़ाई है।
3. कांग्रेस की मांग
कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया है कि अब इस तरह के भेदभावपूर्ण और अपमानजनक व्यवहार को चुपचाप बर्दाश्त करने का समय खत्म हो चुका है। पार्टी ने मांग की है कि सामाजिक वैमनस्य फैलाने और मंच का शुद्धिकरण करने वाले जिम्मेदार लोगों के खिलाफ पुलिस तुरंत एफआईआर (FIR) दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई करे।
