सावन अमावस्या पर 2026 का अंतिम पूर्ण सूर्य ग्रहण: भारत में अदृश्य, लेकिन खगोलीय और धार्मिक दृष्टि से खास
सावन अमावस्या पर 2026 का अंतिम पूर्ण सूर्य ग्रहण: भारत में अदृश्य, लेकिन खगोलीय और धार्मिक दृष्टि से खास
आज सावन मास की अमावस्या (हरियाली अमावस्या) के अवसर पर वर्ष 2026 का अंतिम पूर्ण सूर्य ग्रहण लग रहा है। खगोलशास्त्र और वैदिक ज्योतिष दोनों ही दृष्टियों से इस ग्रहण को बेहद दुर्लभ और महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
1. समय और दृश्यता (Visibility & Timings)
भारत में स्थिति: यह ग्रहण भारतीय समयानुसार रात्रि 9:04 बजे (12 अगस्त) शुरू होगा और तड़के 1:27 बजे (13 अगस्त) समाप्त होगा।
सूतक काल: रात के समय घटित होने के कारण यह भारत में दिखाई नहीं देगा। इस वजह से भारत में सूतक काल, मंदिरों के कपाट बंद होना या पूजा-पाठ पर किसी प्रकार की पाबंदी लागू नहीं होगी।
वैश्विक दृश्यता: यह पूर्ण सूर्य ग्रहण ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन, पुर्तगाल और उत्तरी रूस में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। यूरोप में ऐसा पूर्ण सूर्य ग्रहण लगभग 27 वर्षों बाद और पश्चिमी यूरोप/ब्रिटेन में 64 वर्षों बाद देखा जा रहा है।
2. खगोलीय और ज्योतिषीय महासंयोग
कर्क राशि में त्रिग्रही युति: दशकों बाद सावन अमावस्या के दिन कर्क राशि (जल तत्व) और अश्लेषा नक्षत्र में सूर्य, चंद्रमा और बुध का एक साथ आना विशेष संयोग बना रहा है।
राशियों पर प्रभाव: कर्क राशि का स्वामी चंद्रमा होने के कारण यह ग्रहण वैश्विक मौसम, जलवायु और मानवीय मानसिकता को प्रभावित कर सकता है। विशेषकर मेष, कुंभ और मीन राशि के जातकों को स्वास्थ्य व आर्थिक निर्णयों में सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।
3. धार्मिक महत्व और मंत्र साधना
मंत्र सिद्धि और ध्यान: सावन अमावस्या भगवान शिव और पितरों की पूजा का दिन है। भारत में सूतक काल न होने के बावजूद आध्यात्मिक साधना, ध्यान और दान के लिए यह समय उत्तम माना गया है।
कल्याणकारी उपाय: ग्रहण काल के दौरान भगवान शिव के महामृत्युंजय मंत्र या ‘ॐ नमः शिवाय’ (पंचाक्षरी मंत्र) का जप करना तथा ग्रहण समाप्ति के बाद दान-पुण्य करना विशेष फलदायी माना गया है।
