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सुप्रीम कोर्ट का फैसला: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के तीन बैंक खाते फ्रीज रहेंगे, दैनिक खर्चों के लिए अंतरिम व्यवस्था जारी

सुप्रीम कोर्ट का फैसला: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के तीन बैंक खाते फ्रीज रहेंगे, दैनिक खर्चों के लिए अंतरिम व्यवस्था जारी

​सुप्रीम कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के तीन एचडीएफसी (HDFC) बैंक खातों को फ्रीज करने के प्रवर्तन निदेशालय (ED) के फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया है। हालांकि, न्यायमूर्ति एम.एम. सुंद्रेश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने पार्टी को राहत देते हुए दैनिक खर्चों के संचालन के लिए कलकत्ता हाई कोर्ट द्वारा तय की गई अंतरिम व्यवस्था को जारी रखने की अनुमति दी है।

​1. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुख्य बिंदु

​हाई कोर्ट के आदेश पर मुहर: सुप्रीम कोर्ट ने माना कि कलकत्ता हाई कोर्ट का आदेश संतुलित है, जिससे पार्टी का रोजमर्रा का कामकाज प्रभावित नहीं होगा और न्यायिक निगरानी भी बनी रहेगी।

​गुटबाजी विवाद पर स्टैंड: कोर्ट ने टीएमसी के बागी नेताओं (बिस्वनाथ दास व अन्य) के गुटबाजी से जुड़े दावों में पड़ने से साफ इनकार कर दिया और कहा कि यह मामला सिर्फ बैंक खातों के संचालन तक सीमित है।

​निपटारा: सुप्रीम कोर्ट ने दोनों संबंधित याचिकाओं का निपटारा करते हुए पक्षों को कलकत्ता हाई कोर्ट में लंबित मुख्य मामले व विशेष अधिकारी के समक्ष अपनी आपत्तियां उठाने की छूट दी।

​2. बैंक खातों और अंतरिम व्यवस्था का ब्योरा

​खातों में जमा राशि: इन तीन बैंक खातों में कुल ₹440 करोड़ जमा हैं, जिनमें से ईडी के अनुसार ₹164 करोड़ की संदिग्ध लेनदेन जांच के दायरे में है।

​विशेष अधिकारी की निगरानी: कलकत्ता हाई कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस सुब्रत तालुकदार को विशेष अधिकारी नियुक्त किया गया है।

​निकासी की प्रक्रिया: टीएमसी के दो अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं के साथ-साथ विशेष अधिकारी के प्रति-हस्ताक्षर (Counter-signature) होने पर ही दैनिक व कानूनी खर्चों के लिए चेक के माध्यम से राशि निकाली जा सकेगी।

​3. पक्ष और विपक्ष की दलीलें

​कपिल सिब्बल (TMC के वकील): उन्होंने दलील दी कि ₹400 करोड़ से अधिक की पूरी राशि फ्रीज कर दी गई है, जिससे कर्मचारियों को वेतन और अन्य भुगतान देना मुश्किल हो रहा है।

​एस.वी. राजू (ASG, ED की ओर से): उन्होंने कहा कि PMLA कानून के तहत कार्रवाई की गई है और पार्टी को दैनिक खर्चों के लिए पहले से ही विशेष राहत मिली हुई है।

​पृष्ठभूमि: बिधाननगर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर के आधार पर ईडी ने PMLA की धारा 17(1-ए) के तहत यह कार्रवाई की थी।

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