अरुणाचल प्रदेश के स्थानों का नामकरण: भारत के कड़े रुख पर चीन की बौखलाहट और विदेश मंत्रालय का जवाब
अरुणाचल प्रदेश के स्थानों का नामकरण: भारत के कड़े रुख पर चीन की बौखलाहट और विदेश मंत्रालय का जवाब
भारत सरकार द्वारा सर्वे ऑफ इंडिया (Survey of India) के आधिकारिक नक्शे में अरुणाचल प्रदेश के 27 प्रमुख स्थानों (झीलों, बस्तियों और स्मारकों) के नाम शामिल किए जाने के बाद चीन ने आपत्ति जताई है। इस पर भारत के विदेश मंत्रालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है और इस निर्विवाद सच्चाई को कोई बदल नहीं सकता।
1. भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) का रुख
अटूट सच्चाई: विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है।
द्विपक्षीय संबंधों पर प्रभाव: भारत ने चीनी पक्ष को स्पष्ट कर दिया है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना दोनों देशों के बीच समग्र द्विपक्षीय संबंधों के सामान्य विकास के लिए अनिवार्य शर्त है।
2. WMCC की 36वीं बैठक और LAC की समीक्षा
बैठक का संदर्भ: विदेश मंत्रालय ने बताया कि 6 अगस्त 2026 को भारत-चीन सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय के लिए कार्यकारी तंत्र (WMCC) की 36वीं बैठक आयोजित की गई थी।
रणनीतिक चर्चा: इस बैठक में दोनों पक्षों ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर स्थिति की विस्तृत समीक्षा की।
सैन्य व कूटनीतिक चैनल: दोनों देश WMCC, स्थानीय कमांडर-स्तर की बैठकों और अन्य स्थापित चैनलों के माध्यम से बातचीत जारी रखने और LAC पर किसी भी गलतफहमी से बचने पर सहमत हुए हैं।
3. चीन की बौखलाहट का कारण
चीन का दावा: चीन 2017 से अरुणाचल प्रदेश के विभिन्न स्थानों को अपने नक्शे में (दक्षिणी तिब्बत बताकर) दिखाता रहा है, जिसे भारत हमेशा से खारिज करता आया है।
ग्लोबल टाइम्स का बयान: भारत द्वारा अपने आधिकारिक मानचित्र में अरुणाचल प्रदेश के 27 स्थानों के नामों को दर्ज करने के बाद, चीनी सरकारी मीडिया ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने दावा किया कि भारत के इस कदम से दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ सकता है।
