सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कसता सरकारी शिकंजा: इंटरमीडियरी स्टेटस और ‘सेफ हार्बर’ पर गहराया संकट
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कसता सरकारी शिकंजा: इंटरमीडियरी स्टेटस और ‘सेफ हार्बर’ पर गहराया संकट
मेटा (Meta) के हालिया विवाद के बाद भारत सरकार अब अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ भी सख्ती से पेश आने की तैयारी कर रही है। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि ये कंपनियां भारतीय आईटी कानूनों का सख्ती से पालन कर रही हैं या नहीं।
1. इंटरमीडियरी स्टेटस की समीक्षा और ‘रिकमेंडेशन सिस्टम’
जांच के दायरे में एल्गोरिदम: सरकार यह जांचेगी कि क्या ये प्लेटफॉर्म केवल एक ‘माध्यम’ (Intermediary) हैं या अपने एल्गोरिदम व रिकमेंडेशन सिस्टम के जरिए यह तय कर रहे हैं कि यूजर को क्या कंटेंट दिखाया जाए।
पेड प्रमोशन पर सवाल: यदि कोई प्लेटफॉर्म पैसे लेकर किसी खास कंटेंट को प्रमोट करता है, तो उसे केवल एक न्यूट्रल माध्यम नहीं माना जाएगा और उसकी भूमिका की सीधी जिम्मेदारी तय की जाएगी।
2. क्या है ‘सेफ हार्बर’ और आईटी एक्ट की धारा 79?
कानूनी सुरक्षा का दायरा: आईटी एक्ट की धारा 79 के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को ‘सेफ हार्बर’ (Safe Harbour) की सुविधा मिलती है। इसके तहत यूज़र्स द्वारा पोस्ट किए गए किसी भी अवैध या आपत्तिजनक कंटेंट के लिए प्लेटफॉर्म को सीधे जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
सुरक्षा समाप्त होने का खतरा: यदि प्लेटफॉर्म इंटरमीडियरी के तौर पर अपनी कानूनी जिम्मेदारियां पूरी करने में विफल रहते हैं, तो उनका सेफ हार्बर स्टेटस खत्म किया जा सकता है। इसके बाद उन पर सीधे कानूनी कार्रवाई हो सकेगी।
3. विवाद का घटनाक्रम: मेटा की माफी और केंद्रीय मंत्री के साथ बैठक
पीएम मोदी के वीडियो का मामला: यह पूरा मामला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक फेसबुक वीडियो को हटाए जाने के बाद गर्माया। इस घटना के बाद मेटा के चीफ ग्लोबल अफेयर्स ऑफिसर जोएल कैपलन और सीईओ मार्क जकरबर्ग ने खेद व्यक्त किया था।
अश्विनी वैष्णव के साथ बैठक: केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के साथ हुई बैठक में सरकार ने मेटा से पूछा कि क्या वह पैसे लेकर किसी विशेष कंटेंट को अलग तरीके से प्रमोट कर रही है। बैठक में कंपनी ने अपनी गलती स्वीकार की थी।
