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भारत में ₹10 और ₹20 के पॉलीमर नोटों का फील्ड ट्रायल मंजूर; वित्त वर्ष 2027-28 तक प्रचलन में लाने का लक्ष्य

भारत में ₹10 और ₹20 के पॉलीमर नोटों का फील्ड ट्रायल मंजूर; वित्त वर्ष 2027-28 तक प्रचलन में लाने का लक्ष्य

​केंद्र सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए ₹10 और ₹20 के पॉलीमर (प्लास्टिक आधारित) बैंक नोटों के फील्ड ट्रायल को मंजूरी दे दी है। राज्यसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, दोनों मूल्यवर्गों के 100-100 करोड़ (1-1 अरब) नोट प्रायोगिक तौर पर जारी किए जाएंगे।

​1. पॉलीमर नोटों से जुड़ी मुख्य बातें

​कानूनी व प्रशासनिक आधार: आरबीआई अधिनियम, 1934 की धारा 25 के तहत केंद्रीय बैंक के निदेशक मंडल की सिफारिश पर सरकार ने यह स्वीकृति दी है।

​समानांतर प्रचलन: पॉलीमर नोटों को बाजार में मौजूद कागजी नोटों को बंद किए बिना उनके साथ ही समानांतर (Parallel) रूप से चलाया जाएगा।

​प्रमुख फायदे:

​अधिक टिकाऊ: कागजी नोटों की तुलना में प्लास्टिक/पॉलीमर नोट पानी, धूल और घिसावट से जल्दी खराब नहीं होते।

​सुरक्षा और जालसाजी पर रोक: इनमें आधुनिक और उन्नत सुरक्षा विशेषताएं शामिल करना आसान होता है, जिससे नकली नोटों (FICN) पर लगाम लगेगी।

​लागत में कमी: लंबी आयु के कारण बार-बार नए नोट छापने का खर्च घटेगा।

​2. समय-सीमा और वर्तमान स्थिति

​शुरुआती चरण: वित्त मंत्री के अनुसार, इन नोटों के लिए आवश्यक खरीद और टेंडर प्रक्रिया अभी शुरुआती चरण में है, इसलिए परियोजना की कुल लागत तय होना बाकी है।

​लक्ष्य (2027-28): आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि पायलट प्रोजेक्ट के परिणामों का विस्तृत मूल्यांकन करने के बाद, केंद्रीय बैंक का लक्ष्य वित्त वर्ष 2027-28 तक पॉलीमर नोटों को व्यापक प्रचलन में लाना है।

​वैश्विक उदाहरण: ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और ब्रिटेन जैसे देश पहले से ही पॉलीमर नोटों का सफलतापूर्वक उपयोग कर रहे हैं।

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