NEET विरोध-प्रदर्शन मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई: छात्रों को बड़ी राहत, गंभीर अपराधियों को छोड़कर FIR बंद करने के निर्देश
NEET विरोध-प्रदर्शन मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई: छात्रों को बड़ी राहत, गंभीर अपराधियों को छोड़कर FIR बंद करने के निर्देश
NEET पेपर लीक के विरोध में जंतर-मंतर और देशभर में प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर दर्ज पुलिस केसों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में CJI सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने महत्वपूर्ण सुनवाई की। अदालत ने स्पष्ट किया है कि निर्दोष छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकारें कानून के तहत उनके खिलाफ दर्ज FIR को बंद (Closure Report) या वापस (Withdraw) ले सकती हैं।
1. ‘आपराधिक इतिहास’ (Criminal Antecedents) शब्द पर सुप्रीम कोर्ट का स्पष्टीकरण
केवल गंभीर अपराध शामिल: सुप्रीम कोर्ट ने अपने पिछले आदेश को स्पष्ट करते हुए कहा कि ‘आपराधिक इतिहास’ का मतलब हत्या, बलात्कार (Rape) जैसे गंभीर और जघन्य अपराधों से है।
छोटे मामलों को राहत: सीनियर एडवोकेट ए.एम. सिंघवी की दलील को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने माना कि ट्रैफिक चालान, छोटे-मोटे अपराध या पुराने राजनीतिक प्रदर्शनों को ‘आपराधिक इतिहास’ मानकर छात्रों को राहत देने से वंचित नहीं किया जा सकता।
2. छात्र बनाम हार्ड क्रिमिनल: अलग-अलग श्रेणी बनाने का निर्देश
CJI की टिप्पणी: CJI ने सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता से कहा कि सबसे पहले FIR को अलग-अलग करना होगा—एक आम प्रदर्शनकारी छात्रों के लिए और दूसरा ऐसे अपराधियों के लिए जो छात्रों की आड़ में हिंसा भड़काने आए थे।
SG तुषार मेहता का पक्ष: केंद्र सरकार की ओर से पेश SG ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि सरकार अपने वादे पर कायम है और प्रदर्शनकारी छात्रों को राहत देने के लिए कानून के मुताबिक कदम उठाएगी। हालांकि, SG ने बताया कि ऐसे 2,738 लोगों की पहचान की गई है जिन पर हत्या या दुष्कर्म जैसे गंभीर मामले दर्ज हैं, उन्हें राहत नहीं दी जा सकती।
3. घायल पुलिसकर्मियों के परिवारों की अर्जी
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान घायल हुए पुलिसकर्मियों के परिजनों ने भी सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर पक्षकार बनने की मांग की है। उनकी मांग है कि ड्यूटी के दौरान पुलिस अधिकारियों पर हमला करने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
4. निष्पक्ष जांच के लिए हाई-पावर्ड कमेटी का विचार
पूरे मामले और पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष व स्वतंत्र जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट एक हाई-पावर्ड कमेटी (SIT या रिटायर्ड जज की अगुवाई में कमेटी) गठित करने पर विचार कर रहा है, जिस पर सरकार और याचिकाकर्ता दोनों पक्ष सहमत दिखे।
5. प्राइवेसी और फेशियल रिकॉग्निशन (Facial Surveillance) का मुद्दा
याचिकाकर्ताओं की ओर से एडवोकेट हरिहरन ने आरोप लगाया कि विरोध स्थलों पर बड़े पैमाने पर बिना अनुमति फेशियल रिकॉग्निशन तकनीक (Facial Recognition) का इस्तेमाल किया गया, जो निजता के अधिकार (Privacy) का उल्लंघन है।
CJI का कड़ा संदेश: “अदालत यह साफ कर देना चाहती है कि छात्रों की आड़ में घुसे अपराधियों को कोई संरक्षण नहीं मिलेगा, लेकिन साथ ही ज्यादती करने वाले पुलिस अधिकारियों को भी बख्शा नहीं जाएगा।”
