मध्य प्रदेश विधानसभा में भारी हंगामे के बीच UCC बिल पास: बहुविवाह पर रोक और लिव-इन का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य
मध्य प्रदेश विधानसभा में भारी हंगामे के बीच UCC बिल पास: बहुविवाह पर रोक और लिव-इन का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य
मध्य प्रदेश विधानसभा से एक बड़ी खबर सामने आई है। भारी हंगामे और विपक्ष के तीखे विरोध के बीच राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) बिल पारित हो गया है। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने हंगामे के बीच ही विधेयक को पास घोषित किया।
उत्तराखंड के बाद मध्य प्रदेश देश का ऐसा दूसरा राज्य बन गया है जिसने विधानसभा में समान नागरिक संहिता बिल पारित किया है।
UCC बिल के प्रमुख प्रावधान
विवाह और तलाक का पंजीकरण अनिवार्य: जनजातीय समुदायों को छोड़कर, राज्य में सभी धर्मों के लोगों के लिए विवाह (शादी) और तलाक का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया गया है।
बहुविवाह, तीन तलाक और हलाला पर रोक: कानून में बहुविवाह पर पूरी तरह रोक लगाने के साथ-साथ तीन तलाक और निकाह हलाला को दंडनीय अपराध बनाया गया है।
लिव-इन रिलेशनशिप के नियम: एक महीने के भीतर लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन न कराने पर 3 महीने तक की जेल का प्रावधान है। यदि पुरुष साथी महिला को छोड़ता है, तो महिला अदालत से भरण-पोषण (मंथली मेंटेनेंस) की मांग कर सकती है।
बच्चों को समान अधिकार: जैविक, गोद लिए गए, सरोगेसी या एआरटी (ART) तकनीक से जन्मे सभी बच्चों को समान कानूनी और उत्तराधिकार अधिकार दिए जाएंगे।
जनजातीय समुदाय (ST) बाहर: प्रदेश की अनुसूचित जनजातियों को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का बयान
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बिल पास होने पर प्रदेश की जनता को बधाई दी और इसे 8.5 करोड़ नागरिकों के लिए ‘सुनहरा दिन’ बताया:
उन्होंने कहा कि यह कानून ‘एक देश, एक संविधान’ के विजन को साकार करता है और महिलाओं को बहुविवाह की तकलीफों से आजादी दिलाएगा।
सीएम ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस हमेशा से धर्म के नाम पर बंटवारे की राजनीति करती आई है।
कांग्रेस का कड़ा विरोध और आपत्तियां
विपक्षी दल कांग्रेस ने बिल का पुरजोर विरोध करते हुए इसे सिलेक्ट कमेटी के पास भेजने की मांग की। विरोध के दौरान कांग्रेस विधायक सदन के वेल में उतर आए, जिसके चलते कार्यवाही दो बार (10 मिनट और 15 मिनट) स्थगित करनी पड़ी।
कांग्रेस नेता जयवर्धन सिंह: “जनता यूसीसी की मांग नहीं कर रही है। युवा चाहते हैं कि सरकार पेपर लीक खत्म करे, रोजगार दे और विकास का रास्ता बनाए। बीजेपी सांप्रदायिक मुद्दों को हवा दे रही है।”
कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद: उन्होंने इस बिल को असंवैधानिक तरीके से पारित करने का आरोप लगाते हुए धरना दिया और इस कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का ऐलान किया।
