अन्तर्राष्ट्रीय

मोस्ट वांटेड लिस्ट में शामिल गैंगस्टर नीतीश कौशल को FBI ने वर्मोंट से किया गिरफ्तार, 30 देशों में फैला है सिंडिकेट

मोस्ट वांटेड लिस्ट में शामिल गैंगस्टर नीतीश कौशल को FBI ने वर्मोंट से किया गिरफ्तार, 30 देशों में फैला है सिंडिकेट

​वाशिंगटन/नई दिल्ली: फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पंजाब से ताल्लुक रखने वाले भारतीय नागरिक और गैंगस्टर नीतीश कौशल उर्फ ‘लाला’ को वर्मोंट (अमेरिका) से गिरफ्तार कर लिया है। कौशल को कुछ ही दिनों पहले एफबीआई ने अपनी मोस्ट वांटेड सूची में शामिल किया था। यह गिरफ्तारी पंजाब के जग्गू भगवानपुरिया संगठित अपराध समूह (सिंडिकेट) के खिलाफ अमेरिका में चल रही एक बहुत बड़ी अंतरराष्ट्रीय जांच के तहत हुई है। इस गिरोह पर उत्तरी अमेरिका, यूरोप और ओशिनिया सहित दुनिया भर में नेटवर्क चलाने का आरोप है।

​वैश्विक स्तर पर 1,000 से अधिक सदस्यों का नेटवर्क

​समाचार एजेंसी आईएएनएस को मिले 44 पन्नों के फेडरल चार्जशीट के अनुसार, इस आपराधिक सिंडिकेट का मुख्यालय भारत में है।

​विशाल नेटवर्क: इस गिरोह के दुनिया भर में 1,000 से ज्यादा सदस्य और सहयोगी हैं, जिनमें से 100 से अधिक अकेले अमेरिका में सक्रिय हैं। यह सिंडिकेट अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड तक फैला हुआ है।

​अपराधों की सूची: यह संगठन सुपारी लेकर हत्या (मर्डर-फॉर-हायर), अपहरण, जबरन वसूली, हथियारों की तस्करी, ड्रग्स तस्करी, मानव तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग जैसी गंभीर आपराधिक गतिविधियों से मोटी कमाई करता था।

​गैंग का इतिहास: कथित फाउंडर जग्गू भगवानपुरिया पहले जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई से जुड़ा था, लेकिन बाद में उसने अपना स्वतंत्र और विरोधी अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क खड़ा कर लिया।

​नीतीश कौशल पर अपहरण और फिरौती के संगीन आरोप

​अदालती दस्तावेजों के अनुसार, नीतीश कौशल इस सिंडिकेट के लिए हिंसा, अपहरण और हमलों जैसी वारदातों को अंजाम देता था। उसके खिलाफ प्रमुख आरोपों में 10 जुलाई 2024 की एक घटना शामिल है:

​बंधक बनाना और मारपीट: ड्रग्स की खेप चोरी होने के संदेह में कौशल और उसके सह-आरोपियों ने कैलिफोर्निया के मैन्टेका में एक व्यक्ति को बंधक बनाया और उसके साथ गंभीर मारपीट की। बाद में उसे फ्रेज़्नो के एक अपार्टमेंट में ले जाया गया।

​$50,000 की मांग: गिरोह ने पीड़ित को मुक्त करने के बदले में 50,000 डॉलर (लगभग 41 लाख रुपये) की फिरौती मांगी थी। हालांकि, बाद में आंतरिक विवाद सुलझाने के लिए जग्गू भगवानपुरिया के निर्देश पर पीड़ित को रिहा कर दिया गया।

​ट्रकों के जरिए ड्रग्स तस्करी और हथियारों की सप्लाई

​अभियोजकों का दावा है कि इस गिरोह की आय का मुख्य जरिया मादक पदार्थों की बड़े पैमाने पर तस्करी था।

​यह गिरोह दक्षिणी कैलिफोर्निया में कोकीन और मेथामफेटामाइन एकत्र करता था और लंबी दूरी के ट्रकों के माध्यम से पूर्वी अमेरिका या अमेरिका-कनाडा सीमा तक भेजता था। प्रत्येक खेप में आमतौर पर 100 किलोग्राम या उससे अधिक ड्रग्स होती थी।

​सिंडिकेट ने नेवाडा से गैर-कानूनी तरीके से हथियार खरीदकर उन्हें अमेरिका और कनाडा में स्मगल भी किया।

​महज ₹20,000 में शूटरों की भर्ती

​चार्जशीट में बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि यह गैंग पंजाब में नाबालिगों और कमजोर युवाओं को पैसे, ताकत, और भारत छोड़कर विदेश (अमेरिका-कनाडा) में सैटल कराने का लालच देकर भर्ती करता था।

​सस्ती सुपारी: कोर्ट फाइलिंग के अनुसार, भारत में हत्या जैसी वारदातों को अंजाम देने के लिए युवाओं को महज 20,000 रुपये (लगभग 200 डॉलर) तक दिए जाते थे। उगाही के लिए गिरोह के सदस्य पीड़ितों के भारत में रहने वाले परिवारों की जानकारी जुटाकर एन्क्रिप्टेड ऐप्स से धमकियां देते थे। कई मामलों में पंजाब के भ्रष्ट अधिकारियों के साथ मिलकर विरोधियों पर झूठे केस भी दर्ज कराए गए।

​ट्रायल से पहले हिरासत में रखने की मांग

​25 जून को कैलिफोर्निया की जिला अदालत द्वारा कौशल के खिलाफ फेडरल अरेस्ट वारंट जारी किया गया था। वह अमेरिका में एक बिना वैध कानूनी दस्तावेज वाला नागरिक (एलियन) था। फेडरल वकीलों ने कोर्ट से उसे ट्रायल से पहले हिरासत में रखने की मांग की है, क्योंकि उसके अमेरिका से भागने का भारी खतरा है और वह समाज के लिए बेहद खतरनाक है। हालांकि, अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक अदालत में संदेह से परे दोष सिद्ध नहीं हो जाता, तब तक कानूनन उसे निर्दोष माना जाएगा।

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